Thursday, September 10, 2026
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महाकाल की भस्म आरती में गूंजा ‘हर-हर महादेव’, उज्जैन में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में तड़के ब्रह्म मुहूर्त के दौरान भव्य भस्म आरती का आयोजन हुआ। सुबह लगभग 4 बजे जैसे ही गर्भगृह के पट खुले, पूरा मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा। इस पावन क्षण का साक्षी बनने के लिए हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।

देश-विदेश से उमड़ी आस्था की भीड़

भस्म आरती के दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। भगवान महाकाल के अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर भक्त भावविभोर नजर आए। मंदिर परिसर में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।

पंचामृत अभिषेक से हुआ आरती का शुभारंभ

भस्म आरती से पूर्व भगवान महाकाल का पारंपरिक पंचामृत अभिषेक किया गया। जल, दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से विधिवत स्नान कराते हुए रुद्रपाठ और वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया। शंखध्वनि और घंटियों की मधुर ध्वनि ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।

भस्म श्रृंगार का विशेष महत्व

अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का विशेष भस्म श्रृंगार किया गया, जो इस आरती की सबसे खास परंपरा मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म जीवन की नश्वरता और वैराग्य का प्रतीक है, जो भक्तों को आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करता है।

भक्ति और साधना का अनुपम संगम

आरती के दौरान मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, मंत्र-जप और ध्यान का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालु शांत और एकाग्र भाव से आरती के दर्शन करते हुए भक्ति में लीन रहे। मान्यता है कि भस्म आरती के दर्शन से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त होता है।

उज्जैन बना वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत पहचान है। उज्जैन आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आस्था और अध्यात्म का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां हर दिन हजारों श्रद्धालु आध्यात्मिक अनुभव के लिए पहुंचते हैं।

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