मध्यप्रदेश में गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया 10 अप्रैल से शुरू होने जा रही है, लेकिन बुरहानपुर जिले में खरीदी शुरू होने से ठीक पहले ही व्यवस्थाओं की गंभीर खामियां सामने आ गई हैं। प्रशासन ने पूरे जिले के लिए केवल एक खरीदी केंद्र निर्धारित किया है, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
एक ही केंद्र, हजारों किसानों पर दबाव
जिले में गेहूं उत्पादन पर्याप्त मात्रा में होता है, लेकिन इसके बावजूद लोनी समिति के अंतर्गत मोहम्मदपुरा वेयरहाउस को ही एकमात्र खरीदी केंद्र बनाया गया है। इससे सैकड़ों किसानों को अपनी उपज बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
वेयरहाउस में गंदगी और संसाधनों की कमी
मौके पर मौजूद हालात बेहद चिंताजनक हैं। वेयरहाउस परिसर में धूल और कचरे का अंबार लगा हुआ है। तौल कांटे तक ठीक स्थिति में नहीं हैं, वहीं बारदानों की भारी कमी बनी हुई है। किसानों के लिए पीने के पानी और बैठने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ रही है।
पंजीयन हुआ, लेकिन स्लॉट बुकिंग शुरू नहीं
अब तक 571 किसानों ने गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया है, लेकिन खरीदी शुरू होने से एक दिन पहले तक एक भी स्लॉट बुक नहीं हो पाया है। इससे किसानों में भ्रम और नाराजगी की स्थिति बन गई है।
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पिछले वर्षों का रिकॉर्ड भी चिंता बढ़ाने वाला
गौर करने वाली बात यह है कि पिछले चार वर्षों से इस केंद्र पर गेहूं खरीदी नहीं हो सकी है। ऐसे में इस बार भी खरीदी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
किसानों ने उठाई मांग, प्रशासन पर दबाव
किसानों ने प्रशासन से तत्काल व्यवस्थाएं सुधारने और अतिरिक्त खरीदी केंद्र खोलने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अब प्रशासन की परीक्षा
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते इन कमियों को दूर कर पाएगा या फिर किसानों को एक बार फिर अव्यवस्था का सामना करना पड़ेगा। आने वाले दिनों में स्थिति स्पष्ट होगी, लेकिन फिलहाल किसान चिंता में हैं।











