Zero Waste Party Initiative:आज जब प्लास्टिक प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं, तब जीरो वेस्ट पार्टी पहल जैसी छोटी लेकिन असरदार कोशिशें उम्मीद की नई किरण दिखा रही हैं। महाराष्ट्र के पुणे शहर से शुरू हुई जीरो वेस्ट पार्टी पहल आज पर्यावरण के प्रति जागरूक लोगों के बीच एक अनोखी मिसाल बन चुकी है।
जीरो वेस्ट पार्टी पहल की शुरुआत पुणे के पर्यावरण समूह वसुंधरा स्वच्छता अभियान से जुड़े शैलेश वालवाइकर ने अपनी पत्नी डॉ. पल्लवी वालवाइकर के साथ वर्ष 2016 में की थी। मकर संक्रांति जैसे छोटे घरेलू आयोजनों में बड़ी मात्रा में डिस्पोजेबल प्लेट, कटोरी और गिलास का कचरा देखकर उनके मन में बदलाव की सोच आई।उन्होंने महसूस किया कि कुछ घंटों के समारोह के लिए इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक कचरा वर्षों तक धरती पर बना रहता है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने घर से स्टील की प्लेट, कटोरी और गिलास का छोटा बर्तन बैंक शुरू किया।
कैसे काम करती है जीरो वेस्ट पार्टी पहल?
आज जीरो वेस्ट पार्टी पहल पूरी तरह विश्वास और सहयोग के आधार पर काम कर रही है। लोगों को पार्टी, पूजा, हल्दी-कुमकुम, जन्मदिन या किसी छोटे कार्यक्रम के लिए बर्तनों की जरूरत होती है तो वे व्हाट्सएप ग्रुप में संदेश भेजते हैं।जिस सदस्य के पास बर्तन उपलब्ध होते हैं, वह उन्हें मुफ्त में दे देता है। कार्यक्रम खत्म होने के बाद बर्तनों को साफ करके वापस लौटा दिया जाता है। इसमें कोई किराया या सिक्योरिटी राशि नहीं ली जाती।
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पुणे के कई इलाकों में फैल चुका है यह अभियान
शुरुआत में सीमित लोगों तक रहने वाली जीरो वेस्ट पार्टी पहल अब पुणे के बानेर, पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (PCMC) क्षेत्र के कई हिस्सों तक पहुंच चुकी है। पिंपले निलख इलाके के सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्रीहरि सुथमल्ली जैसे कई लोग इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।श्रीहरि सुथमल्ली के घर में हमेशा स्टील की प्लेटें, कटोरियां और गिलास तैयार रहते हैं, जिन्हें वे आसपास के लोगों को समारोह के लिए उपलब्ध कराते हैं। उनके जैसे कई स्वयंसेवकों ने इस विचार को समाज तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।
समाज के सहयोग से बढ़ता गया कारवां
जीरो वेस्ट पार्टी पहल को आगे बढ़ाने में विवेक अग्रवाल, दिनेश गाडेवार, विद्या अनंतवार और पुष्पा हेलवाड़े जैसे लोगों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ये लोग अपने घरों में बर्तनों का संग्रह रखते हैं और जरूरत पड़ने पर दूसरों को उपलब्ध कराते हैं।यह पहल केवल बर्तन साझा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में भरोसे और संसाधनों को साझा करने की संस्कृति को भी मजबूत कर रही है।
छोटी पार्टियों से निकलता है बड़ा प्लास्टिक कचरा
जीरो वेस्ट पार्टी पहल के पीछे सबसे बड़ी सोच यह है कि छोटे-छोटे कार्यक्रम भी बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करते हैं। एक हफ्ते में कई हल्दी-कुमकुम कार्यक्रम या जन्मदिन समारोह में सैकड़ों डिस्पोजेबल प्लेट और गिलास इस्तेमाल होकर फेंक दिए जाते हैं।अगर इनकी जगह बार-बार इस्तेमाल होने वाले स्टील के बर्तनों का उपयोग किया जाए तो हर साल हजारों किलो प्लास्टिक कचरे को कम किया जा सकता है।
आप भी बन सकते हैं पर्यावरण के सच्चे साथी
जीरो वेस्ट पार्टी पहल यह संदेश देती है कि पर्यावरण को बचाने के लिए हमेशा बड़े प्रोजेक्ट की जरूरत नहीं होती। कोई भी व्यक्ति अपने घर में छोटा सा बर्तन बैंक बनाकर अपने पड़ोसियों और समाज के साथ संसाधन साझा कर सकता है।आज पुणे से शुरू हुई यह पहल देश के दूसरे शहरों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। अगर अधिक लोग इस मॉडल को अपनाएं तो छोटी-छोटी खुशियां मनाते हुए भी धरती को स्वच्छ और सुरक्षित रखा जा सकता है।









