नई दिल्ली : नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जल्द ही भारत के दौरे पर आ रहे हैं। दिल्ली एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। इस हाई-लेवल विजिट में रूस के रक्षा मंत्री सहित सात कैबिनेट मंत्री भी उनके साथ भारत पहुंचेंगे। उनके इस दौरे से पहले सोशल मीडिया पर एक सवाल तेजी से चर्चाओं में है—व्लादिमीर पुतिन का धर्म क्या है और वे किस चर्च में जाते हैं?
पुतिन रखते हैं रूढ़िवादी ईसाई धर्म में विश्वास
रूस के राष्ट्रपति पुतिन रूसी रूढ़िवादी ईसाई धर्म (Russian Orthodox Christianity) को मानते हैं। पुतिन को कई बार चर्च की प्रार्थना सभाओं, धार्मिक त्योहारों और विशेष क्रिसमस आयोजन में हिस्सा लेते हुए देखा गया है।जानकार बताते हैं कि पुतिन की परवरिश एक धर्मनिष्ठ ईसाई मां ने की, जिसने बचपन से ही उनमें धार्मिक मान्यताओं के बीज बो दिए। यही वजह है कि वे हमेशा अपने गले में क्रॉस का लॉकेट पहनते हैं।
रूस भले ही धर्मनिरपेक्ष—लेकिन बहुमत ऑर्थोडॉक्स ईसाई
भले ही रूस आधिकारिक रूप से एक धर्मनिरपेक्ष देश है, लेकिन इसकी लगभग 50% से अधिक आबादी रूढ़िवादी ईसाई धर्म को मानती है।ईसाइयों के तीन बड़े पंथ—कैथलिक, प्रोटेस्टेंट और ऑर्थोडॉक्स—में से रूस का प्रमुख पंथ ऑर्थोडॉक्स है।विश्व में करीब 300 मिलियन ऑर्थोडॉक्स ईसाई हैं, जिनमें से लगभग 100 मिलियन सिर्फ रूस में रहते हैं।
धर्म पर पुतिन के जवाब हमेशा सधे हुए
2007 में टाइम मैगजीन को दिए एक इंटरव्यू में जब उनसे व्यक्तिगत धार्मिक मान्यताओं पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा।धर्म राजनीति या सार्वजनिक जीवन को कितना प्रभावित करना चाहिए, इस पर भी उन्होंने बहुत संतुलित और सावधानी से उत्तर दिया।जब उनसे पूछा गया कि क्या वे “सर्वोच्च ईश्वर” में विश्वास रखते हैं, तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया, जिससे उनकी निजी धार्मिक आस्था और अधिक रहस्यमय हो गई।
भारत दौरे से पहले पुतिन का धर्म क्यों चर्चा में?
पुतिन विश्व राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। उनकी यात्रा को लेकर उत्सुकता के बीच लोग यह भी जानना चाहते हैं कि रूस के इतने ताकतवर नेता की धार्मिक आस्थाएँ क्या हैं।पुतिन के चर्च जाने, धार्मिक आयोजनों में भाग लेने और क्रॉस पहने रहने की तस्वीरें अक्सर वायरल होती रहती हैं—इस वजह से भारत दौरे से ठीक पहले उनका धर्म फिर चर्चा में है।











