Uttarakhand news : उत्तराखंड में ‘हिमालयन सुनामी’, छेनागाड़ गांव मलबे में तब्दील, SDRF राहत-बचाव में जुटी

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Uttarakhand news : रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड का छेनागाड़ गांव, जो कभी हरे-भरे पहाड़ों और नदियों के बीच बसा एक शांतिपूर्ण बाजार क्षेत्र था, 28 अगस्त की शाम बादल फटने से मलबे के ढेर में तब्दील हो गया। खेती, पशुपालन और छोटे कारोबार पर टिका यह गांव अब पूरी तरह उजड़ चुका है।

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बसुकेदार तहसील के बड़ेथ डुंगर तोक क्षेत्र में बादल फटने की इस घटना ने बाजार, घरों और खेतों को बहा दिया। रुद्रप्रयाग के एसपी अक्षय पप्रह्लाद कोंडे ने बताया कि छेनागाड़ में 8 लोग लापता हैं—जिनमें 4 स्थानीय और 4 नेपाली मूल के हैं। केदारनाथ हाईवे बांसवाड़ा में बंद होने से राहत व बचाव दल फंसे हैं। SDRF की टीमें पैदल मौके के लिए रवाना हो चुकी हैं।

तबाही का मंजर

  • छेनागाड़ बाजार: दुकानें मलबे में दब गईं, वाहन बह गए।
  • डुगर गांव: कई घर तबाह, लोग लापता।
  • अरखुण्ड: मछली तालाब व मुर्गी फार्म बह गए।
  • किमाणा: खेती की जमीन व सड़कें बोल्डरों और मलबे से पटी।
  • स्यूर: मकान ध्वस्त, बोलेरो वाहन बहा।
  • जौला बड़ेथ व बगडधार: गदेरों में पानी और मलबा गांवों में घुसा।

चमोली जिले में भी नुकसान हुआ। देवाल क्षेत्र के मोपाटा गांव में एक दंपत्ति लापता, दो लोग घायल और 15-20 मवेशी दब गए। केदारनाथ घाटी के लावारा गांव में मोटर ब्रिज बह गया। अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां उफान पर हैं।

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राहत और बचाव कार्य

जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में जिला स्तरीय अधिकारियों को तैनात किया गया है। NH, PWD और PMGSY की टीमें सड़कें खोलने में जुटी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि “राहत कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना की टीमें सक्रिय हैं।

ग्रामीणों की पीड़ा

एक ग्रामीण ने बताया, “हमारा बाजार और घर सब मलबे में दब गए। लोग गुम हो गए, वाहन बह गए। अब सिर्फ डर और उम्मीद बची है।”

एक महिला बोलीं, “राहत टीमें आ रही हैं, पर रास्ते बंद हैं। भगवान से प्रार्थना है कि कोई चमत्कार हो।”

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तबाही के पीछे कारण

  • जलवायु परिवर्तन के चलते वर्षा का पैटर्न बदला, छोटे इलाकों में भारी बारिश की घटनाएं बढ़ीं।
  • हिमालय की ढलानों से मलबा और पानी तेजी से गांवों में आया।
  • अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां उफान पर आकर गदेरों में तब्दील हुईं।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में क्लाउडबर्स्ट और ग्लेशियर झील फटने (GLOF) की घटनाएं और बढ़ेंगी।
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