वॉशिंगटन। अमेरिका ने H1-B वीजा के लिए शुल्क में बड़ा बदलाव किया है। अब तक 6 लाख रुपये ली जाने वाली यह फीस 88 लाख रुपये तक बढ़ा दी गई है। यह नई नीति 21 सितंबर यानी आज से लागू हो रही है। ट्रंप प्रशासन के इस कदम ने H1-B वीजा धारकों और आवेदन करने वालों में कन्फ्यूजन बढ़ा दिया है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लीविट ने स्पष्ट किया कि यह शुल्क सिर्फ नए वीजा धारकों के लिए है। मौजूदा वीजा होल्डर्स को नई फीस नहीं देनी होगी। साथ ही, अगर कोई वर्कर या कंपनी अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक हित या सार्वजनिक भलाई से जुड़ा है, तो गृह सुरक्षा सचिव उसे शुल्क से छूट दे सकते हैं।
नई फीस का असर भारतीय पेशेवरों पर सबसे ज्यादा पड़ सकता है, क्योंकि अमेरिका में H1-B वीजा से जाने वाले करीब 70 प्रतिशत वर्कर्स भारतीय हैं। नई फीस बढ़ने से कंपनियों की विदेशी वर्कर्स को नियुक्त करने की लागत बढ़ जाएगी, जिससे वे भारत जैसे देशों से कर्मचारियों को बुलाने में कम रुचि दिखा सकते हैं। इसका परिणाम भारत में बेरोजगारी बढ़ने के रूप में देखने को मिल सकता है।
H1-B वीजा अमेरिकी कंपनियों को विदेशी पेशेवरों जैसे इंजीनियर, वैज्ञानिक और कंप्यूटर प्रोग्रामर को काम पर रखने की अनुमति देता है। यह वीजा 3 साल के लिए मिलता है और 6 साल तक बढ़ाया जा सकता है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य अमेरिका में हाई-स्किल वर्कर्स को लाना है और अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों की सुरक्षा करना है।











