Trump Iran Conflict 2026 : नई दिल्ली/वॉशिंगटन। दुनिया एक बार फिर पश्चिम एशिया (Middle East) में बड़े युद्ध की कगार पर खड़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए घोषणा की है कि एक ‘मैसिव अर्माडा’ (विशाल नौसैनिक बेड़ा) ईरान की ओर बढ़ रहा है। ट्रंप का यह कदम वेनेजुएला में हुए ‘ऑपरेशन सदर्न स्पियर’ से भी बड़ा बताया जा रहा है, जिसमें हाल ही में अमेरिका ने निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल कर गिरफ्तार किया था।
क्या है ट्रंप का ‘अर्माडा’ प्लान? राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान परमाणु संवर्धन, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और हमास-हिजबुल्लाह जैसे समूहों को समर्थन बंद नहीं करता, तो अमेरिका ‘स्पीड और वायलेंस’ के साथ हमला करेगा।
-
नौसैनिक ताकत: इस बेड़े में USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर, गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर्स और भारी बमवर्षक विमान शामिल हैं।
-
सैनिक तैनाती: क्षेत्र में वर्तमान में 35,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक और दर्जनों जंगी जहाज ‘रेडी और एबल’ मोड में हैं।
-
इजरायल का साथ: अमेरिकी मिसाइल डेस्ट्रॉयर USS Delbert D. Black इजरायल के ईलात बंदरगाह पहुँच चुका है, जो रणनीतिक घेराबंदी का हिस्सा है।
वेनेजुएला से तुलना क्यों? ट्रंप ने इस ऑपरेशन को वेनेजुएला से बड़ा इसलिए बताया क्योंकि वहां 2025 में अमेरिका ने 20 हजार सैनिकों के साथ मादुरो सरकार का तख्तापलट किया था। ईरान के मामले में तैयारी उससे कहीं अधिक व्यापक है, क्योंकि ईरान की सैन्य क्षमता और उसका परमाणु कार्यक्रम अमेरिका के लिए कहीं बड़ी चुनौती है।
ईरान की जवाबी तैयारी ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने दो टूक कहा है कि “ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन धमकी के साये में नहीं।”
-
युद्ध अभ्यास: ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ‘लाइव-फायर’ एक्सरसाइज कर रहा है।
-
सुरक्षा कवच: ईरान ने अपने न्यूक्लियर गोल्ड और परमाणु साइट्स को पहाड़ों की गहराई में छिपा दिया है।
-
ड्रोन कैरियर: ईरान का ड्रोन कैरियर ‘शहीद बघेरी’ भी तैनात है।
दुनिया पर क्या होगा असर? सऊदी अरब और UAE जैसे खाड़ी देश इस तनाव से चिंतित हैं। यदि युद्ध छिड़ता है तो:
-
तेल की कीमतें: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
-
ग्लोबल इकोनॉमी: विश्व अर्थव्यवस्था में बड़ी मंदी आने का खतरा है।
-
क्षेत्रीय युद्ध: यह संघर्ष इजरायल, लेबनान और यमन तक फैल सकता है।
फिलहाल, गेंद ईरान के पाले में है। ट्रंप ने डिप्लोमेसी के लिए ‘न्यूक्लियर डील’ का विकल्प खुला रखा है, लेकिन उनकी ‘मैक्सिमम प्रेशर’ पॉलिसी ने युद्ध की संभावना को प्रबल कर दिया है।













