‘पूरे देश पर कब्जा करने की साजिश’, ओवैसी ने मंत्रियों को हटाने वाले विधेयक पर उठाए सवाल

हैदराबाद : ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को हटाने संबंधी हाल ही में पेश किए गए विधेयक पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या राष्ट्रपति सच में प्रधानमंत्री को इस्तीफा देने पर मजबूर कर सकता है। ओवैसी ने इसे संविधान के मूल अनुच्छेद से टकराने वाला कदम बताया।

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पूरे देश पर कब्जा करने की साजिश
ओवैसी ने 130वें संविधान संशोधन में कई खामियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि यह संशोधन पूरे देश पर कब्जा करने की रणनीति है और यह अच्छा संकेत नहीं है। ओवैसी ने चेतावनी दी कि केंद्र सरकार इसका फायदा उठाकर मंत्रियों को गिरफ्तार करना शुरू कर सकती है। उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि यदि नैतिकता की बात होती है तो ऐसा कानून क्यों नहीं बनाया जाता कि जो भी पकड़ा जाए वह बीजेपी में शामिल न हो।

संविधान और राष्ट्रपति की शक्तियां
हैदराबाद के सांसद ने कहा कि संविधान में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह और सहायता से काम करेंगे। उन्होंने तर्क दिया कि प्रस्तावित कानून राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री को हटाने का अधिकार देता है, जो मौजूदा कानून के विपरीत है।

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ओवैसी ने कहा, “हमारे संविधान में कहा गया है कि भारत के राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह और सहायता से काम करेंगे। जबकि प्रस्तावित विधेयक कह रहा है कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को हटा सकता है। यह स्पष्ट रूप से संविधान के अनुच्छेद के विपरीत है।”

राज्य मंत्रियों की गिरफ्तारी और सरकारों की गिरावट
ओवैसी ने चिंता जताई कि अगर केंद्र सरकार चार या पांच राज्य मंत्रियों को गिरफ्तार करती है, तो राज्य सरकार अपने आप गिर जाएगी। उन्होंने कहा, “आजादी कहां है? आप ही उन्हें नियंत्रित करेंगे… बस चार या पांच मंत्रियों को गिरफ़्तार कर लो और सरकार चली जाएगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र शासित प्रदेशों में पूरा गृह विभाग केंद्र सरकार के पास रहता है। ऐसे में राज्य सरकारों की स्वतंत्रता सवालों के घेरे में आती है।

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संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया बिल
इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा गया है। इसमें प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्रियों को हटाने का प्रावधान है, जो गंभीर अपराधों के आरोपों का सामना कर रहे हों और लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहे हों। 130वें संशोधन के जरिए सरकार कानून बनाने का प्रयास कर रही है। बिल को गृह मंत्री अमित शाह ने पेश किया था। जेपीसी में इस पर विचार किया जाएगा, हालांकि टीएमसी, सपा और आप ने अपने सांसदों को जेपीसी में नहीं भेजने का फैसला किया है।

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