दिल्ली | सोमवार | 6 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद असामान्य और अभूतपूर्व घटना घटी, जब वकील राकेश किशोर कुमार ने सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की। यह कृत्य अचानक हुआ, लेकिन अदालत कक्ष में मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी वकील को तुरंत हिरासत में ले लिया और स्थिति को नियंत्रण में कर लिया। इस हंगामे के बावजूद, मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ (जो पीठ की अध्यक्षता कर रहे थे) ने असाधारण संयम का प्रदर्शन किया। उन्होंने अदालत में मौजूद सभी लोगों से विचलित न होने का आग्रह करते हुए कहा, “हम विचलित नहीं हैं। ये चीजें मुझे प्रभावित नहीं करती हैं।” उनके इस शांत और दृढ़ रवैये की सभी वकीलों और अधिकारियों ने सराहना की, और अदालत का काम बिना किसी बड़े व्यवधान के जारी रहा।
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दिल्ली पुलिस ने लगभग तीन घंटे तक राकेश किशोर कुमार से पूछताछ की। पुलिस की जांच में यह सामने आया कि यह कृत्य किसी बाहरी आपराधिक साजिश या संगठित समूह से जुड़ा नहीं था। पूछताछ के दौरान, आरोपी ने अपने कार्य पर कोई पछतावा नहीं जताया और दावा किया कि उसे “दैवीय शक्ति” से मार्गदर्शन मिला था। इस निष्कर्ष के आधार पर, पुलिस ने आरोपी वकील को औपचारिक शिकायत दर्ज किए बिना चेतावनी देकर रिहा कर दिया और उसके जूते भी वापस कर दिए। हालांकि, इस गंभीर अवमानना के तुरंत बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने कड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाया। SCBA के सह सचिव मीनेश दुबे के अनुसार, चूंकि राकेश किशोर ने माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया, इसलिए एसोसिएशन ने उनका लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया।
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यह घटना भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक अप्रत्याशित घटना थी, जिसने सुप्रीम कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। इस अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए अदालत परिसर की सुरक्षा व्यवस्थाओं की तत्काल समीक्षा और मजबूती के आदेश दिए गए हैं। वहीं, मुख्य न्यायाधीश का संयमित और अडिग रहना, देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था की मजबूती और गरिमा को प्रदर्शित करता है।













