Impact of No Cost EMI Ban: क्या सच में 30 हजार वाला स्मार्टफोन 24 हजार में मिलेगा? जानिए AIMRA के नए प्रस्ताव का गणित

VIKASH KHALKHO

Impact of No Cost EMI Ban: टेक एवं बिजनेस डेस्क। यदि आप आने वाले दिनों में नया स्मार्टफोन खरीदने का मन बना रहे हैं, तो भारतीय मोबाइल बाजार में एक बड़ा नीतिगत बदलाव आपकी जेब को बड़ी राहत दे सकता है। ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) ने सैमसंग, एपल, शाओमी, वीवो, ओप्पो और रियलमी जैसी देश की अग्रणी स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों से ‘No Cost EMI’ स्कीमों को पूरी तरह बंद करने की अपील की है।

रिटेलर्स संघ का तर्क है कि नो कॉस्ट ईएमआई की आड़ में लगने वाले वित्तीय बोझ के कारण उन ग्राहकों को भी भारी-भरकम रकम चुकानी पड़ती है, जो फोन का पूरा भुगतान एक बार में (कैश या फुल पेमेंट) करते हैं।

क्यों उठी ‘No Cost EMI’ बंद करने की मांग?

AIMRA के अनुसार, 24 महीने तक चलने वाली नो कॉस्ट ईएमआई योजनाओं में बैंकों और फाइनेंस कंपनियों द्वारा लिया जाने वाला ब्याज दरअसल स्मार्टफोन कंपनियां स्वयं वहन करती हैं। कंपनियों के लिए इस योजना को चलाने की लागत फोन की कुल कीमत का लगभग 17% से 19% बैठती है।

स्मार्टफोन ब्रांड्स इस 17-19% के अतिरिक्त वित्तीय खर्च को पहले से ही मोबाइल के एमआरपी (MRP) यानी मूल मूल्य में जोड़ देते हैं। नतीजा यह होता है कि फुल पेमेंट करने वाले खरीदार भी अनजाने में ईएमआई स्कीम की लागत चुका रहे होते हैं।

गणितीय विश्लेषण: कितना सस्ता हो सकता है आपका फोन?

यदि कंपनियां इस हिडन चार्ज को हटाकर सीधा ग्राहकों को डिस्काउंट के रूप में दें, तो कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट आ सकती है:

विवरण (Description) मौजूदा स्थिति (No Cost EMI के साथ) प्रस्तावित स्थिति (No Cost EMI बंद होने पर)
स्मार्टफोन की औसतन कीमत ₹30,000 ₹30,000
ईएमआई स्कीम की लागत (~18%) ₹5,400 (कीमत में शामिल) ₹0 (कीमत से बाहर)
ग्राहक को मिलने वाली नई कीमत ₹30,000 ~₹24,600
कुल बचत ₹0 ₹5,400 तक की सीधी राहत

आरबीआई (RBI) की सख्ती और आगे की राह

फिलहाल यह पूरा प्रस्ताव चर्चा और मांगों के दौर में है। किसी भी स्मार्टफोन ब्रांड ने अभी तक नो कॉस्ट ईएमआई पूरी तरह बंद करने या आधिकारिक रूप से कीमतों में कटौती की घोषणा नहीं की है।

वहीं दूसरी ओर, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी ईएमआई और डिजिटल फाइनेंसिंग से जुड़े नियमों पर शिकंजा कसा है। आरबीआई के नए दिशानिर्देशों के तहत बैंकों और लोन देने वाली संस्थाओं के लिए Key Facts Statement (KFS) में लोन की ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और छिपे हुए चार्जेज की स्पष्ट जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे ग्राहकों को ईएमआई की वास्तविक लागत का पता लगाने में आसानी होगी।

यदि रिटेलर्स की यह मांग स्वीकार कर ली जाती है, तो देश में एकमुश्त भुगतान कर फोन खरीदने वाले करोड़ों भारतीय ग्राहकों को बड़ी वित्तीय राहत मिलना तय माना जा रहा है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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