Teacher’s Day : शिक्षक दिवस स्पेशल – गांधी-नेहरू-जिन्ना के गुरुओं की अनसुनी कहानियां

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नई दिल्ली– हर साल 5 सितंबर को भारत में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन देश के महान शिक्षक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर समर्पित होता है। इस मौके पर यह जानना रोचक है कि भारत और पड़ोसी राष्ट्र पाकिस्तान के तीन बड़े नेताओं—महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना—के जीवन में शिक्षकों का कितना महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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महात्मा गांधी (2 अक्टूबर 1869 – 30 जनवरी 1948)

गांधीजी का जन्म पोरबंदर, गुजरात में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर और राजकोट के स्थानीय शिक्षकों से हुई। उन्होंने अपने जीवन और आत्मकथा में उल्लेख किया कि गोपालकृष्ण गोखले उनके राजनीतिक गुरु और मार्गदर्शक थे। गोखले ने उन्हें राजनीतिक सोच, समाज सेवा और नेतृत्व की दिशा दिखाई।

पंडित जवाहरलाल नेहरू (14 नवंबर 1889 – 27 मई 1964)

नेहरू का जन्म इलाहाबाद में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर निजी शिक्षकों के मार्गदर्शन में हुई। उनके पिता मोतीलाल नेहरू ने सुनिश्चित किया कि उनके लिए विदेशी शिक्षकों की व्यवस्था हो।

प्रमुख शिक्षक: फर्डिनेंड टी. ब्रूक्स, एक आयरिश शिक्षक, जिन्होंने नेहरू को अंग्रेज़ी, इतिहास और विज्ञान पढ़ाया। ब्रूक्स ने नेहरू में वैज्ञानिक सोच और तार्किक दृष्टि को निखारा, जो उनके भविष्य के नेतृत्व और निर्णयों में सहायक रही।

मोहम्मद अली जिन्ना (25 दिसंबर 1876 – 11 सितंबर 1948)

जिन्ना का जन्म कराची में हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा सिंध मदरसतुल इस्लाम से प्राप्त की। उनके शिक्षक स्थानीय विद्वान थे, जिन्होंने उन्हें उर्दू, गुजराती और अंग्रेज़ी पढ़ाई।

जिन्ना ने भी अपने राजनीतिक गुरु के रूप में गोपालकृष्ण गोखले को माना, जो गांधीजी के भी गुरु थे। गोखले के मार्गदर्शन ने उन्हें राजनीतिक दृष्टि और नेतृत्व क्षमता दी।

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खास बातें:

  • गोपालकृष्ण गोखले ऐसे शिक्षक थे जिन्होंने दोनों नेताओं, गांधी और जिन्ना, को राजनीतिक दिशा दी।
  • शिक्षक केवल किताबों तक सीमित नहीं रहते; वे जीवन के मार्गदर्शक भी होते हैं।
  • नेहरू और जिन्ना के शिक्षक उन्हें अलग-अलग क्षमताओं में प्रशिक्षित कर उनके व्यक्तित्व और सोच को निखारने में मददगार साबित हुए।

इस शिक्षक दिवस पर यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि शिक्षक सिर्फ शिक्षा देने वाले नहीं होते, बल्कि वे जीवन की दिशा और नेतृत्व क्षमता विकसित करने वाले मार्गदर्शक भी होते हैं। गांधी, नेहरू और जिन्ना के जीवन में उनके गुरुओं का योगदान यही साबित करता है।

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