नई दिल्ली : कल 21 सितंबर को साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण लगने वाला है। यह दिन सर्वपितृ अमावस्या से भी जुड़ा है। हालांकि भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, फिर भी धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी से जुड़ी सावधानियां बरतना जरूरी माना जाता है।
हिंदू धर्म में तुलसी का महत्व:
तुलसी का पौधा केवल औषधीय ही नहीं बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। सूर्य या चंद्र ग्रहण के समय तुलसी का विशेष महत्व बढ़ जाता है।
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ग्रहण के समय तुलसी से जुड़ी 5 गलतियां जिन्हें भूलकर भी न करें:
- तुलसी को छूना या पानी देना:
ग्रहण के दौरान तुलसी को छूना या पानी देना वर्जित माना जाता है। ऐसा करने से पौधे पर अशुभ प्रभाव पड़ सकता है। - पत्तियां तोड़ना:
ग्रहण के समय तुलसी की पत्तियां तोड़ना निषिद्ध है। इससे ग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है। - तुलसी को खुले में रखना:
घर के खुले हिस्से में तुलसी रखना अशुभ माना जाता है। इस दौरान पौधे को हल्के रंग के कपड़े से ढक देना चाहिए। - पत्ते किसी को देना:
ग्रहण के समय तुलसी के पत्ते किसी अन्य व्यक्ति को देना या बांटना नहीं चाहिए। - ध्यान न देना:
ग्रहण में तुलसी के प्रति लापरवाही रखने से नकारात्मक प्रभाव अधिक हो सकता है। इसलिए पूजा और ध्यान के साथ पौधे की देखभाल करनी चाहिए।
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सूर्य ग्रहण का समय सिर्फ खगोलीय घटना ही नहीं बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। तुलसी से जुड़ी इन नियमों का पालन करने से नकारात्मक ऊर्जा से बचा जा सकता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।













