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SIR Revision : सुप्रीम कोर्ट में आज SIR पर अहम सुनवाई, चुनाव आयोग के अधिकारों पर उठे सवाल

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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट आज निर्वाचन आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर महत्वपूर्ण सुनवाई करेगा। यह मामला वोटर लिस्ट की शुद्धता, नागरिकता की पहचान और मतदान के मौलिक अधिकार से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। बिहार, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने गंभीर आपत्तियां जताई थीं, जिसके बाद कई याचिकाएं शीर्ष अदालत में दाखिल की गईं।

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ कर रही है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि SIR की आड़ में वैध नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकते हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

क्या है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)?

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) एक विशेष प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची की गहन जांच की जाती है। इसका उद्देश्य फर्जी, मृत या विदेशी नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाना बताया जाता है। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया कुछ राज्यों में राजनीतिक रूप से प्रेरित हो सकती है।

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 चुनाव आयोग का पक्ष: “पूरा संवैधानिक अधिकार है”

6 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई में चुनाव आयोग (EC) ने सुप्रीम कोर्ट में साफ कहा था कि SIR कराना उसका संवैधानिक अधिकार और कर्तव्य है। आयोग ने दलील दी कि मतदाता सूची में किसी भी विदेशी नागरिक का नाम न हो, यह सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है।

आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और न्यायाधीश जैसे सभी संवैधानिक पदों पर केवल भारतीय नागरिक ही आसीन हो सकते हैं। इसलिए नागरिकता की पुष्टि लोकतंत्र की बुनियाद है।

TMC सांसदों की याचिका, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों की याचिकाओं पर भारत निर्वाचन आयोग से जवाब तलब किया। TMC का आरोप है कि SIR के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं को सूची से बाहर करने की आशंका है।

नागरिकता और वोटिंग अधिकार पर टकराव

याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि चुनाव आयोग को वोटर लिस्ट की शुद्धता सुनिश्चित करने का अधिकार है, लेकिन बिना पर्याप्त प्रक्रिया और पारदर्शिता के किसी का मतदान अधिकार छीना नहीं जा सकता। वहीं आयोग का कहना है कि वह राजनीतिक बयानों पर प्रतिक्रिया देने के लिए बाध्य नहीं है, उसका मूल दायित्व निष्पक्ष और पारदर्शी वोटर लिस्ट बनाए रखना है।

आज की सुनवाई से यह तय हो सकता है कि SIR प्रक्रिया की संवैधानिक सीमाएं क्या होंगी और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

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