नई दिल्ली : निठारी कांड के चर्चित आरोपी सुरेंद्र कोली को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी। कोर्ट ने उनकी क्यूरेटिव पिटीशन स्वीकार करते हुए उनकी बची हुई अंतिम सजा को भी रद्द कर दिया और उन्हें सभी मामलों में बरी घोषित कर दिया। यह फैसला इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि निठारी कांड ने 2005 से 2007 के बीच पूरे देश को दहला दिया था।
12 मामलों में पहले ही बरी, एक आखिरी मामले में बची थी सजा
कोली पर कुल 13 मामलों में मुकदमे चले थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले ही 12 मामलों में उन्हें बरी कर चुका था, लेकिन एक मामला ऐसा था जिसमें उनकी सजा बरकरार थी। इसी अंतिम सजा को चुनौती देते हुए कोली ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने आज फैसला सुनाते हुए कहा कि, “जब एक ही सबूत और परिस्थितियों के आधार पर आरोपी 12 मामलों में बरी हो सकता है, तो उसी आधार पर एक मामले में दोष सिद्ध करना न्यायसंगत नहीं।” अदालत ने पाया कि जिस 15 वर्षीय लड़की की हत्या और बलात्कार के मामले में उन्हें सजा मिली थी, उसका सबूत कमजोर और संदेह के दायरे में है। इसलिए कोली को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि वे किसी अन्य मामले में बंद नहीं हैं, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने 2011 की सजा भी रद्द की
सुरेंद्र कोली की क्यूरेटिव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ—CJI डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ—ने 7 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज फैसला सुनाते हुए जजों ने कहा— “2011 में दी गई उम्रकैद की सजा रद्द की जाती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश भी रद्द। याचिकाकर्ता को पूरी तरह बरी किया जाता है।” जस्टिस विक्रम नाथ ने टिप्पणी की कि “रसोई के चाकू से हड्डियाँ काटना संभव नहीं है,” इसलिए कई आरोप तकनीकी रूप से कमजोर पाए गए।
क्या था निठारी कांड?
निठारी कांड हाल के दशकों का सबसे भयावह अपराध था। 2005–2006 में नोएडा के निठारी गांव से बच्चों और युवतियों के गायब होने की घटनाओं ने पुलिस का ध्यान खींचा। दिसंबर 2006 में पंधेर की कोठी के पास से 8 कंकाल मिलने पर बड़ा खुलासा हुआ।
तब इसकी जांच में कुल 19 शव मिले, जिनमें अधिकतर बच्चे थे। आरोप था कि बच्चों का अपहरण, रेप, हत्या और शवों के टुकड़े तक किए जाते थे। सुरेंद्र कोली, जो मोनिंदर सिंह पंधेर का नौकर था, इस मामले में सह-आरोपी बना। शुरुआती पूछताछ में उसने कई अपराधों को कबूल किया था, लेकिन बाद में कहा कि यह स्वीकारोक्ति पुलिस दबाव में कराई गई थी।
15 वर्षीय रिंपा हल्दर हत्याकांड में मिली थी सजा
कोली को जिस एक मामले में सजा मिली थी, वह रिंपा हल्दर नाम की लड़की का मुद्दा था। अब इस केस में भी सबूत कमजोर पाए जाने के बाद अदालत ने इसे खारिज कर दिया।सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कोली अब निठारी कांड के सभी मामलों से बरी हो चुका है।











