Supreme Court : भोपाल : सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में शराब उद्योग से जुड़े एक अहम विवाद में फैसला सुनाया। यह मामला फ्रांस की बहुराष्ट्रीय कंपनी पर्नोड रिकार्ड और इंदौर के कारोबारी करणवीर सिंह छाबड़ा की कंपनी जेके इंटरप्राइजेज के बीच ब्रांड नाम को लेकर था। पर्नोड का आरोप था कि जेके इंटरप्राइजेज ने अपने ब्रांड *लंदन प्राइड* के नाम और पैकेजिंग से उनके लोकप्रिय ब्रांड *ब्लेंडर्स प्राइड* की नकल की है, जिससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं।
Supreme Court : फ्रांस की कंपनी के वकीलों ने अदालत में तर्क दिया कि उपभोक्ता गुमराह हो सकते हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रीमियम व्हिस्की खरीदने वाला वर्ग आमतौर पर पढ़ा-लिखा, समझदार और आर्थिक रूप से सक्षम होता है। ऐसे उपभोक्ता केवल लेबल देखकर फैसला नहीं लेते और उनके भ्रमित होने की संभावना बहुत कम है।
Supreme Court : पर्नोड कंपनी ने यह विवाद पहले इंदौर की वाणिज्यिक अदालत और फिर हाईकोर्ट में लड़ा, लेकिन दोनों जगह हार का सामना करना पड़ा। आखिरकार मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुनवाई के दौरान दोनों कंपनियों की बोतलें अदालत में पेश की गईं। चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने हंसी में टिप्पणी की कि “आप बोतलें साथ लाए हैं?”, जिस पर वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि अंतर दिखाने के लिए ऐसा करना जरूरी था।
Supreme Court : अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ट्रेडमार्क का मूल्यांकन समग्र रूप से होगा, न कि केवल किसी एक शब्द के आधार पर। ‘प्राइड’ शराब उद्योग में आम शब्द है और इस पर किसी कंपनी का विशेषाधिकार नहीं हो सकता। कोर्ट ने साफ किया कि ब्लेंडर्स प्राइड और लंदन प्राइड दोनों ब्रांड भारतीय बाजार में मौजूद रह सकते हैं।
Supreme Court : कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला ट्रेडमार्क कानून के लिए मील का पत्थर है। अदालत ने पहली बार भारतीय कानून में “पोस्ट-सेल कन्फ्यूजन” सिद्धांत को मान्यता दी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि व्हिस्की जैसे निजी उपभोग वाले उत्पादों में इसका असर सीमित रहेगा।
Supreme Court : विशेषज्ञों के अनुसार इस फैसले का असर फैशन, लग्जरी और ऑटोमोबाइल सेक्टर जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। कंपनियों को अब केवल नाम की समानता के आधार पर राहत नहीं मिलेगी, बल्कि उपभोक्ता भ्रम के ठोस सबूत पेश करने होंगे।
Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय न केवल पर्नोड रिकार्ड और जेके इंटरप्राइजेज के बीच विवाद को खत्म करता है बल्कि भविष्य के ब्रांड विवादों की दिशा भी तय करता है।













