Rakhar NTPC : सिंगरौली। ऊर्जाधानी सिंगरौली में राखड़ (फ्लाई ऐश) के प्रबंधन और परिवहन को लेकर एक बार फिर भीषण जनआक्रोश की स्थिति निर्मित हो गई है। विंध्यनगर स्थित एनटीपीसी के एसडेम (ऐश डाइक) क्षेत्र से निकलने वाली राखड़ को ग्रामीण इलाकों से जबरन ले जाए जाने के विरोध में प्रभावित ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर मोर्चा खोल दिया। बीती शाम से शुरू हुआ यह आंदोलन अगले दिन दोपहर तक चला, जिसमें ग्रामीणों ने मुख्य मार्ग पर लंबा रोड जाम कर दिया। इस चक्काजाम के कारण घंटों आवागमन बाधित रहा और क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
Rakhar NTPC : ग्रामीणों का मुख्य आरोप है कि राखड़ से लदे भारी वाहन बिना ढंके और सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर गांवों के बीच से गुजर रहे हैं। इससे न केवल सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं, बल्कि उड़ती राखड़ ने पूरे क्षेत्र की हवा को जहरीला बना दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हवा में घुली राख के कारण सांस संबंधी बीमारियां, आंखों में जलन और त्वचा के रोग आम हो गए हैं, जिसका सबसे बुरा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है।
Rakhar NTPC : आंदोलन के दौरान विस्थापितों का दर्द भी छलक उठा। प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया कि एनटीपीसी ने परियोजनाओं के लिए उनकी उपजाऊ जमीनें अधिग्रहित कर लीं और उनके घर उजाड़ दिए। इसके बावजूद, कंपनी ने न तो उन्हें स्थायी रोजगार दिया और न ही समुचित पुनर्वास की व्यवस्था की। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी कागजों तक ही सीमित हैं। “हमारी जमीनें गई और घर उजड़े, लेकिन बदले में हमें सिर्फ प्रदूषण और बीमारियां मिलीं,” यह नारा प्रदर्शन के दौरान गूंजता रहा।
Rakhar NTPC : प्रदर्शनकारियों ने राखड़ परिवहन के इस पूरे कारोबार में बड़े भ्रष्टाचार और अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि कंपनी के कुछ अधिकारियों और रसूखदार ठेकेदारों की मिलीभगत से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। बिना तिरपाल ढंके ट्रक और निर्धारित रूट के बजाय गांवों की गलियों से गुजरते वाहनों पर प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। इससे पर्यावरण को अपूरणीय क्षति और सरकार को राजस्व की हानि हो रही है।
Rakhar NTPC : कई घंटों तक चले रोड जाम की सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक अमले की लंबी समझाइश के बाद दोपहर करीब 12 बजे जाम को खुलवाया गया। हालांकि, ग्रामीणों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और भारी संख्या में ग्रामीण नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने एनटीपीसी प्रबंधन और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। पुलिस ने उचित जांच और समाधान का आश्वासन दिया है, लेकिन ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।








