संवाददाता: किशोर नाथ राजगुरु/शाजापुर| शाजापुर जिले के सलसलाई में चल रही 9 दिवसीय शिव महापुराण के छठे दिन राम देव मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। कथा के दौरान कथावाचक मुकेश आनंद गिरि महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति और अहंकार के महत्व पर मार्गदर्शन दिया।
कथा में मुकेश आनंद गिरि महाराज ने कहा कि कथा श्रवण और शिव भक्ति प्राप्ति के लिए सबसे पहले अहंकार का त्याग करना आवश्यक है, क्योंकि जब तक अहंकार रहेगा, भोलेनाथ प्रसन्न नहीं होंगे। उन्होंने बताया कि जैसे आदि देव महादेव को भोलेनाथ कहा जाता है, वैसे ही वे भोले भक्तों को प्रिय हैं।
Read news : CG News : नाबालिक बालिका से दुष्कर्म करने वाला आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया
कथावाचक ने शिव और पार्वती के पुत्रों कार्तिकेय और गणेश की कथाओं का वर्णन करते हुए कहा कि कार्तिकेय पुरुषार्थ का प्रतीक हैं, जबकि गणेश की अनेक कथाएं पुराणों में मिलती हैं। उन्होंने बताया कि एक कल्प में श्रीकृष्ण गणेश के पुत्र बनते हैं, दूसरे कल्प में पार्वती के उद्घटन से उनकी उत्पत्ति होती है। शनि की दृष्टि से सिर कटने की कथा और हाथी के सिर से जुड़ी बातें भक्तों को शिक्षा देने के उद्देश्य से सुनाई गई।
मुकेश आनंद गिरि महाराज ने गणेश जी के शारीरिक लक्षणों के प्रतीकात्मक अर्थ भी समझाए – बड़ा सिर सूक्ष्म दृष्टि का, कान सूप के जैसे अनावश्यक बातें न सुनना, एक दांत अटलता का प्रतीक और लंबी नाक प्रतिष्ठा का प्रतीक।
इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ आसपास के अन्य क्षेत्रों से भी श्रद्धालु कथा सुनने आए और भक्ति में लीन रहे।













