Shiv Sena UBT Split Speculation: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना UBT में टूट की अटकलें लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। दावा किया जा रहा है कि शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद पार्टी से अलग होकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो 19 जून 2026 को होने वाले शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस से पहले यह उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।
बढ़ती शिवसेना UBT में टूट की अटकलें के बीच पार्टी नेता संजय राउत ने शिंदे गुट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके गुट के कुछ सांसदों से संपर्क किया जा रहा है और उन्हें पार्टी छोड़ने के लिए आर्थिक लालच दिया जा रहा है।संजय राउत ने आरोप लगाया कि सांसदों को एडवांस में 15 करोड़ रुपये तक की पेशकश की जा रही है। हालांकि इन आरोपों पर शिंदे गुट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक गतिविधियां
महाराष्ट्र में चल रही शिवसेना UBT में टूट की अटकलें के बीच राजनीतिक गतिविधियां दिल्ली तक पहुंच गई हैं। ताजा जानकारी के अनुसार उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे दिल्ली रवाना हो चुके हैं। वहीं शिवसेना UBT के कुछ नेता भी राजधानी पहुंचे हैं।राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि आगामी मॉनसून सत्र से पहले पार्टी के भीतर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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दलबदल कानून को लेकर बनाई जा रही रणनीति?
सूत्रों के अनुसार शिवसेना UBT में टूट की अटकलें के पीछे दलबदल विरोधी कानून से बचने की रणनीति को भी एक वजह माना जा रहा है। लोकसभा में किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सांसद यदि एक साथ अलग होते हैं, तो वे अयोग्यता के खतरे से बच सकते हैं।इसी कारण 9 में से 6 सांसदों के एक साथ फैसला लेने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
उद्धव खेमा बचाव की कोशिश में जुटा
संभावित राजनीतिक संकट को देखते हुए उद्धव ठाकरे का खेमा भी सक्रिय हो गया है। शिवसेना UBT में टूट की अटकलें सामने आने के बाद पार्टी सांसद अनिल देसाई और संजय राउत दिल्ली पहुंचे हैं।माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व नाराज नेताओं से बातचीत कर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है।
मातोश्री की बैठक में नहीं पहुंचे सभी सांसद
हाल ही में उद्धव ठाकरे ने मुंबई स्थित मातोश्री में अपने सभी नौ सांसदों की बैठक बुलाई थी। लेकिन बैठक में केवल चार सांसद ही मौजूद रहे। इनमें अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय दीना पाटील शामिल थे।कुछ सांसदों के बैठक में शामिल नहीं होने के बाद शिवसेना UBT में टूट की अटकलें और तेज हो गईं। कुछ नेताओं के ऑनलाइन जुड़ने की भी जानकारी सामने आई।
उद्धव ठाकरे के बयान ने खींचा ध्यान
बैठक के बाद उद्धव ठाकरे ने कहा कि जो भी नेता पार्टी छोड़ना चाहता है, वह अपनी इच्छा से जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में समय बदलता रहता है और फैसलों के परिणाम भविष्य में सामने आते हैं।इस बयान को भी शिवसेना UBT में टूट की अटकलें के संदर्भ में काफी अहम माना जा रहा है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर भी चर्चा तेज
पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम की चर्चाओं ने भी राजनीतिक माहौल गर्म कर रखा है। दावा किया जा रहा था कि इसके तहत कुछ सांसद शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं।हालांकि एकनाथ शिंदे ने इन चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा था कि चुनाव खत्म हो चुके हैं और अब किसी प्रकार की संख्या बढ़ाने की जरूरत नहीं है।
चार साल में दूसरी बड़ी चुनौती की संभावना
अगर शिवसेना UBT में टूट की अटकलें सच साबित होती हैं तो यह पिछले चार वर्षों में उद्धव ठाकरे के लिए दूसरा बड़ा झटका होगा। इससे पहले जून 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद बड़ी संख्या में विधायक अलग हो गए थे।इसके बाद चुनाव आयोग ने संख्या बल के आधार पर शिवसेना का नाम और धनुष-बाण चुनाव चिह्न शिंदे गुट को दे दिया था।
स्थापना दिवस से पहले बढ़ा सियासी सस्पेंस
अब सभी की नजर 19 जून 2026 पर टिकी हुई है, जब शिवसेना अपना 60वां स्थापना दिवस मनाने जा रही है। उससे पहले महाराष्ट्र की राजनीति में जारी हलचल ने सस्पेंस बढ़ा दिया है।आने वाले दिनों में सांसदों का फैसला न केवल उद्धव ठाकरे की राजनीतिक ताकत को प्रभावित कर सकता है, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में भी नए समीकरण पैदा कर सकता है।









