SECL Land Acquisition Protest : गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा। रायगढ़ जिले के घरघोड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम कुर्मीभौना, पोरडी और पोरडा के ग्रामीणों ने SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वर्षों से लंबित भू-अर्जन मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार की मांगों को लेकर ग्रामीणों ने एक विस्तृत आंदोलनात्मक आवेदन सौंपा है, जिसमें 16 वर्षों की देरी पर कड़े सवाल उठाए गए हैं।
मुआवजे पर 12% चक्रवृद्धि ब्याज की मांग ग्रामीणों का मुख्य आरोप है कि वर्ष 2004-05 और 2009-10 में उनकी भूमि और संपत्तियों का अधिग्रहण किया गया था, लेकिन कई परिवारों को आज तक उचित मुआवजा नहीं मिला। आवेदन में मांग की गई है कि जिन किसानों का भुगतान 2026 तक लंबित रहा है, उन्हें अधिग्रहण राशि पर 12 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज जोड़कर भुगतान किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जब जमीन और घर तत्काल ले लिए गए, तो भुगतान में डेढ़ दशक से अधिक की देरी करना उनके साथ अन्याय है।
वर्तमान बाजार दर पर मूल्यांकन की शर्त प्रभावित परिवारों ने स्पष्ट किया है कि अधिग्रहण के समय जो राशि (6 से 8 लाख रुपये) तय की गई थी, वह आज के समय में अप्रासंगिक है। उन्होंने मांग की है कि मकानों, पेड़ों और अन्य परिसंपत्तियों का मूल्यांकन वर्ष 2025-26 की वर्तमान बाजार दर के आधार पर किया जाए।
रोजगार और पुनर्वास का मुद्दा आवेदन में ‘प्रत्येक प्रभावित परिवार से कम से कम दो सदस्यों को रोजगार’ देने की मांग को प्रमुखता से रखा गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 2010 के बाद से रोजगार देने की प्रक्रिया धीमी हो गई है, जिससे विस्थापित परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। साथ ही, उन्होंने 2004-05 के पुराने मामलों की पुनः जांच और विस्थापन लाभ के साथ सम्मानजनक पुनर्वास की मांग की है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी ग्रामीणों ने ‘पहले भुगतान, फिर अधिग्रहण’ का नारा बुलंद करते हुए चेतावनी दी है कि यदि SECL प्रबंधन ने उनकी सात सूत्रीय मांगों पर शीघ्र संवेदनशीलता नहीं दिखाई, तो वे व्यापक और उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।









