Scindia Property Dispute : ज्योतिरादित्य सिंधिया और बुआओं के सामने अब बड़े फैसले की घड़ी, हाईकोर्ट ने दी चेतावनी

मध्य प्रदेश – मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने आज सिंधिया परिवार की संपत्ति विवाद (Scindia Property Dispute) में एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अदालत ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीन बुआओं — वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे — को आपसी समझौते के लिए 90 दिनों का समय दिया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि इस अवधि में विवाद सुलझाया नहीं जाता है, तो याचिका फिर से बहाल कर दी जाएगी। यह आदेश ग्वालियर बेंच ने पारित किया और इसे परिवार के बीच लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

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विवाद का इतिहास

  • सिंधिया परिवार की संपत्ति विवाद का जड़ 1961 में महाराजा जीवाजी राव सिंधिया के निधन के बाद हुई वसीयत और संपत्ति वितरण को लेकर है। जीवाजी राव ने स्पष्ट वसीयत नहीं छोड़ी थी, जिससे उनकी Movable और Immovable संपत्तियों का वितरण विवादित हो गया।
  • राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने 1984 में बंबई हाई कोर्ट में सूट दायर किया, जिसमें उन्होंने संपत्ति के आधे हिस्से का दावा किया।
  • विवाद में जीवाजी राव के पुत्र माधवराव सिंधिया और उनके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल हुए।
  • मामला पारिवारिक वसीयत, ट्रस्ट और मौखिक समझौते (verbal agreements) के आधार पर लंबा खिंच गया।
  • इस संपत्ति में क़ीमती ज़मीनें, भवन, ट्रस्ट संपत्ति और निवेश शामिल हैं, जिनकी अनुमानित कीमत ₹20,000 करोड़ से अधिक बताई जाती है।

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हाई कोर्ट का आज का आदेश

  • अदालत ने सभी पक्षों को आपसी समझौते के लिए 90 दिनों का समय दिया।
  • यदि समयावधि में समझौता नहीं होता है, तो याचिका फिर से सक्रिय कर दी जाएगी।
  • कोर्ट ने जोर दिया कि विवाद का शांतिपूर्ण और कानूनी समाधान प्राथमिकता हो।
  • दोनों पक्षों ने अदालत से समझौते के लिए समय मांगा था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया।

विशेषज्ञों की टिप्पणी

  • कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदेश सिंधिया परिवार के लंबे समय से चले आ रहे विवाद में नई दिशा दे सकता है।
  • अदालत की पहल से परिवार के बीच आपसी संवाद और समझौते की संभावना बढ़ी है।
  • यह कदम यह संकेत देता है कि कोर्ट व्यक्तिगत संपत्ति विवादों में पारिवारिक सुलह को प्रोत्साहित करती है।
  • यदि समझौता नहीं होता है, तो कोर्ट सख्त कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
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