Sachin Duggal Delhi High Court : नई दिल्ली: 1.5 अरब डॉलर की वैल्यू वाली कंपनी Builder.ai के मई 2025 में अचानक दिवालिया होने की खबर ने पूरे स्टार्टअप जगत को हिला दिया था। अब MZM एनालिटिक्स की फॉरेंसिक रिपोर्ट ने साफ किया है कि कंपनी का पतन तकनीकी धोखाधड़ी से ज्यादा मैनेजमेंट की विफलता और वित्तीय पारदर्शिता की कमी का नतीजा था।
फॉरेंसिक जांच के 4 बड़े निष्कर्ष
1. VerSe के साथ कारोबार असली था
रिपोर्ट के मुताबिक, Builder.ai और भारतीय कंपनी VerSe के बीच ‘राउंड-ट्रिपिंग’ (सिर्फ कागजों पर लेन-देन) के आरोप गलत साबित होते दिख रहे हैं। 13 हजार मैसेज और ऑडिट दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि:
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जोशफैन ऐप (Joshfan App) का निर्माण वाकई हुआ था।
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डेलीहंट पर विज्ञापन अभियान चलाए गए थे।
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सॉफ्टवेयर और लाइसेंसिंग के काम के ठोस सबूत और डिलीवरी रिकॉर्ड मौजूद हैं।
2. पतन की असली वजह: टॉकडेस्क (Talkdesk) की देनदारी
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि कंपनी VerSe की वजह से नहीं, बल्कि Talkdesk नाम की कंपनी की भारी देनदारी के कारण डूबी।
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नए सीईओ को दिसंबर 2024 में ही इस कर्ज की जानकारी थी, लेकिन इसे महीनों तक छिपाया गया।
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इस खुलासे में देरी के कारण कर्जदाताओं (Lenders) ने खातों से पैसा निकाल लिया, जिससे कंपनी रातों-रात ढह गई।
3. निवेश का पैसा कहां गया?
जांच में किसी भी तरह की हेराफेरी या निजी इस्तेमाल का सबूत नहीं मिला है। निवेश की गई राशि का उपयोग निम्न कार्यों में हुआ:
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R&D और ऑपरेशन
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कर्मचारियों की सैलरी और वेंडर्स का भुगतान
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क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर
4. कमजोर गवर्नेंस और निवेशकों की भूमिका
रिपोर्ट में कंपनी के भीतर निगरानी की कमी पर सवाल उठाए गए हैं। बोर्ड ऑब्जर्वर, जिसके पास औपचारिक अधिकार नहीं थे, वह भी वित्तीय फैसलों और स्टाफिंग में गहराई से शामिल था। यह दर्शाता है कि सिर्फ मैनेजमेंट ही नहीं, बल्कि बोर्ड की निगरानी प्रणाली भी विफल रही।
कोर्ट से राहत: सचिन दुग्गल का वारंट रद्द
दिल्ली हाईकोर्ट ने 26 दिसंबर को संस्थापक सचिन दुग्गल के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को रद्द कर दिया। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच पूरी होने से पहले कठोर कदम उठाना कानून के खिलाफ है और दुग्गल को फिलहाल सिर्फ गवाह माना जाना चाहिए।











