निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मध्य प्रदेश के रीवा जिले के जवा विकासखंड से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां प्रशासन की सतर्कता से एक नाबालिग बच्ची का विवाह समय रहते रोक दिया गया। प्रभारी कलेक्टर सपना त्रिपाठी को जैसे ही इस बाल विवाह की सूचना मिली, उन्होंने तुरंत संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए।
मौके पर पहुंची संयुक्त टीम
निर्देश मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम तत्काल मौके पर पहुंची। उस समय शादी की पूरी तैयारियां हो चुकी थीं और बारात आने वाली थी, लेकिन प्रशासन की मौजूदगी से माहौल बदल गया।
समझाइश से रुका विवाह
कार्रवाई के दौरान अहिंसा वेलफेयर सोसाइटी और समग्र जन चेतना विकास परिषद जैसी संस्थाओं ने भी सक्रिय सहयोग किया। टीम ने परिजनों को बाल विवाह के सामाजिक और कानूनी दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया।
कानून का हवाला, परिजन माने
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत 18 वर्ष से कम आयु की बच्ची का विवाह कराना अपराध है। इसके बाद परिजनों ने अपनी गलती स्वीकार की और शादी रोकने पर सहमति जताई।
लिखित आश्वासन और चेतावनी
मौके पर पंचनामा तैयार किया गया और परिजनों से लिखित में आश्वासन लिया गया कि बच्ची के बालिग होने से पहले विवाह नहीं किया जाएगा। साथ ही भविष्य में ऐसी गलती दोहराने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
समाज के लिए मजबूत संदेश
यह कार्रवाई न केवल कानून के पालन का उदाहरण है, बल्कि समाज के लिए एक स्पष्ट संदेश भी है कि बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर सख्ती से कदम उठाने होंगे।











