गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा। कोल इंडिया की अनुशांगिक इकाई एसईसीएल के रायगढ़ क्षेत्र की बरौद कालरी में सेवानिवृत्त कर्मचारियों का रिवाइज्ड पेंशन तीन वर्षों से अटका हुआ है। 2021 से अब तक करीब 20 रिटायर्ड कर्मचारी अपनी पेंशन बढ़ोतरी की राशि के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन प्रबंधन और कोयला खान भविष्य निधि संगठन क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर के बीच मामला उलझा हुआ है।
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रिटायर्ड कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने बरौद कालरी की खुली खदान परियोजना में वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में सेवाएं दीं, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें दूध में मक्खी की तरह बाहर निकाल दिया गया। पेंशन की बढ़ी हुई दर का लाभ न मिलने से कई कर्मचारी मानसिक और शारीरिक रूप से टूट चुके हैं। इस बीच तीन रिटायर्ड कर्मचारियों की मौत भी हो चुकी है, जिन्हें जीवनकाल में उनका हक नहीं मिल सका।
बताया जा रहा है कि इंजीनियर, फोरमैन, फीटर, ऑपरेटर और लिपिक जैसे पदों से रिटायर हुए इन कर्मचारियों की पेंशन संशोधन की फाइलें 2021 से लंबित हैं। जबकि यह अधिकार उन्हें पिछली वेतन संधि के तहत मिलना चाहिए था। पांच महीनों से प्रबंधन और भविष्य निधि संगठन के बीच लगातार पत्राचार हो रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका है।
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रिटायर्ड कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही उनका मामला निपटाया नहीं गया, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को विवश होंगे। उनका कहना है कि जीवन भर सेवा देने वालों के साथ ऐसा अन्याय शर्मनाक है और यह संवेदनहीनता सीधे मानवता पर चोट है।













