निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में प्रस्तावित “स्ट्रेंजर मीटअप पार्टी” को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। न्यू राजेंद्र नगर स्थित एक कैफे में बीते रविवार 26 अप्रैल को इस आयोजन की तैयारी की जा रही थी, लेकिन कैफे संचालक को जब कार्यक्रम की वास्तविक प्रकृति का पता चला तो उन्होंने तुरंत बुकिंग रद्द कर दी। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर इस इवेंट का प्रचार जारी है, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
सोशल मीडिया बना विवाद की जड़
इवेंट से जुड़े पोस्टर और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें युवतियां डांस और अनजान लोगों से बातचीत करती नजर आ रही हैं। “स्पीड डेटिंग” जैसे कॉन्सेप्ट ने इस आयोजन को और विवादित बना दिया है। यही वजह है कि कई संगठनों ने इसे सामाजिक और नैतिक दृष्टि से गलत बताया है।
बजरंग दल का विरोध, पुलिस से कार्रवाई की मांग
इस मामले में बजरंग दल ने खुलकर विरोध जताया है। संगठन का कहना है कि ऐसे आयोजनों के जरिए गलत गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
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पुलिस का अलर्ट—संदिग्ध गतिविधियों पर सख्ती
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि रायपुर में फिलहाल कोई ऐसा आयोजन नहीं हो रहा है। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त ने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए मिली जानकारी के आधार पर जांच की जा रही है और भविष्य में शांति भंग करने वाले आयोजनों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पिछले साल की कार्रवाई ने बढ़ाई चिंता
सितंबर 2025 में रायपुर पुलिस ने “स्ट्रेंजर पूल पार्टी” और “न्यूड पार्टी” जैसे आयोजनों पर बड़ी कार्रवाई की थी। उस दौरान 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था और आईटी एक्ट व अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ था। साइबर टीम ने तकनीकी विश्लेषण के जरिए पूरे नेटवर्क का खुलासा किया था।
क्या ऐसे इवेंट अपराध का नया जरिया बन रहे हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि अनजान लोगों के साथ होने वाले ऐसे आयोजनों में सुरक्षा जोखिम, शोषण और साइबर अपराध की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। बिना उचित सत्यापन और निगरानी के ये इवेंट युवाओं को खतरे में डाल सकते हैं।
शासन के सामने नई चुनौती
लगातार बढ़ते ऐसे आयोजनों ने पुलिस और प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। सोशल मीडिया के जरिए तेजी से फैलते इन इवेंट्स को नियंत्रित करना आसान नहीं है। ऐसे में साइबर निगरानी और सख्त कानून लागू करना जरूरी हो गया है।











