रायपुर: एक बड़ी खबर के अनुसार रायपुर शहर में स्थित छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा रैन बसेरा, जो बेघर और जरूरतमंद लोगों के लिए आशा की किरण बनना था, अब सुविधाओं की कमी और अव्यवस्था का बुरी तरह से शिकार हो चुका है। पंडरी बस स्टैंड के पास 80 बिस्तरों वाला यह रैन बसेरा वर्तमान में बहुत ही जर्जर हालत में है और वहां ठहरने वाले लोगों के लिए कठिनाइयाँ बढ़ा रहा है।
टूटी-फूटी खिड़कियाँ और ठंड में झोंके मारती हवा
सबसे बड़ी समस्या है टूटी हुई खिड़कियाँ। अधिकांश खिड़कियों में काँच ही नहीं बचा है। ऐसे में जब सर्दियों में तेज हवा अंदर घुसती है और रात में सोना मुश्किल हो जाता है। लोग काँपते हुए पूरी रात जागते रहते हैं। ठंड के मौसम में यह स्थिति और भी असहनीय हो जाती है।
मच्छरों और गंदगी की समस्या
इस बड़े से रैन बसेरे में मच्छरदानी या जाली की कोई व्यवस्था नहीं है। रातभर मच्छर काटते रहते हैं और लोग ठीक से नींद नहीं ले पाते। बिस्तर, चादर और कंबल भी बेहद खराब हालत में हैं। चादरें फटी और मैली हैं, कंबल बदबूदार हैं और कई दिनों से धुले नहीं गए। साफ-सफाई का कोई ध्यान नहीं रखा जाता।
शौचालय और पानी की स्थिति
आलम यह है कि, यहां के शौचालय गंदे रहते हैं और पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसकी वजह से यात्रियों और बेघर लोगों की समस्या और बढ़ जाती है।
निगम की वसूली, सुविधाओं का अभाव
रायपुर नगर निगम यहाँ ठहरने वाले लोगों से प्रति व्यक्ति 40 रुपये प्रतिदिन वसूलता है। इसके बावजूद सुविधा नगण्य है। न तो साफ बिस्तर हैं, न कंबल, न ही ठंड और मच्छरों से बचाव की कोई व्यवस्था। कई लोग मजबूरी में फुटपाथ पर सोना पसंद कर लेते हैं क्योंकि वहाँ हवा की कमी और सुरक्षा का थोड़ा बेहतर इंतज़ाम होता है।
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बेघर लोगों के लिए राहत नहीं, समस्या का केंद्र बन गया
देखा जाए तो,रैन बसेरा गरीबों और यात्रियों को ठंड, बारिश और असुरक्षा से बचाने के लिए बनाया गया था, लेकिन आज यह जगह खुद उनके लिए परेशानी का कारण बन चुकी है। अधिकारियों को चाहिए कि तुरंत मरम्मत, साफ-सफाई, पर्याप्त बिस्तर, कंबल और मच्छर सुरक्षा की व्यवस्था करें, ताकि यह रैन बसेरा वास्तव में जरूरतमंदों के लिए राहत का केंद्र बन सके।











