Babri Masjid : भोपाल : पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक नेता द्वारा कथित तौर पर 6 दिसंबर को ‘बाबरी मस्जिद’ की नींव रखे जाने को लेकर पूरे देश में फैले आक्रोश की लहर मंगलवार को भोपाल तक पहुंच गई। विरोधस्वरूप, विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल के कार्यकर्ता भोपाल के सेकंड बस स्टॉप स्थित एक सुलभ शौचालय का नाम बदलकर ‘बाबर शौचालय’ करने के लिए पहुंच गए। हालांकि, मौके पर भारी संख्या में तैनात पुलिस बल ने उनके इस प्रयास को विफल कर दिया।
Babri Masjid : वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ता ‘बाबर शौचालय’ के पोस्टर लेकर मौके पर पहुंचे थे। जब उन्होंने शौचालय पर पोस्टर लगाने की कोशिश की, तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच नोकझोंक भी हुई। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के कारण यह विरोध प्रदर्शन आगे नहीं बढ़ सका। प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने इस दौरान जमकर नारेबाजी की और कहा, “जो बाबर जैसा काम करेगा, वो कुत्ते की मौत मरेगा।”
Babri Masjid : इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने इस कदम के पीछे की मंशा स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि अगर मस्जिद का निर्माण करना ही है, तो उसे देश के महान व्यक्तियों जैसे एपीजे अब्दुल कलाम के नाम से बनाया जाना चाहिए। तिवारी ने सवाल उठाया, “जिन आक्रांताओं ने भारत के मंदिर तोड़े, हजारों लाखों लोगों की हत्या की, उनको अपना रोल मॉडल क्यों बनाना है?”
Babri Masjid : चंद्रशेखर तिवारी ने अपने बयान में दृढ़ता से कहा कि “बाबर के नाम से तो शौचालय ही ठीक है,” यह कहकर उन्होंने विरोध के पीछे के प्रतीकात्मक अर्थ को उजागर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विरोध उन आक्रांताओं के महिमामंडन के खिलाफ है जिन्होंने भारत की संस्कृति और इतिहास को क्षति पहुंचाई।











