Prajapati Samaj Protest : मऊगंज: मध्य प्रदेश के नवगठित जिले मऊगंज में प्रशासनिक संवेदनहीनता और पोर्टल की तकनीकी खामी ने प्रजापति (कुम्हार) समाज के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जो समाज रीवा जिले में अनुसूचित जाति (SC) के तौर पर पंजीकृत था, वह मऊगंज जिला बनते ही सरकारी दस्तावेजों और ऑनलाइन पोर्टल से पूरी तरह गायब हो गया है। इस गंभीर लापरवाही के कारण पिछले कई महीनों से न तो युवाओं के जाति प्रमाण पत्र बन पा रहे हैं और न ही छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ मिल रहा है।
अखिल भारतीय कुम्हार महासभा के नेतृत्व में आज समाज के हजारों लोगों ने मऊगंज की सड़कों पर उतरकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष राममिलन प्रजापति का आरोप है कि कलेक्टर से लेकर स्थानीय विधायकों और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम तक, सभी को इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है। विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाया गया, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। लोक सेवा केंद्रों से युवाओं को यह कहकर लौटा दिया जाता है कि मऊगंज जिले के मास्टर डेटा में ‘कुम्हार’ जाति का विकल्प ही मौजूद नहीं है।
इस प्रशासनिक भूल की सबसे भारी कीमत समाज के मेधावी छात्र और बेरोजगार युवा चुका रहे हैं। जाति प्रमाण पत्र के अभाव में बच्चों के स्कूलों में दाखिले अटक रहे हैं और स्कॉलरशिप न मिलने से कई छात्रों की पढ़ाई बीच में ही छूट गई है। वहीं, सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं की उम्र निकली जा रही है, क्योंकि वे आरक्षित श्रेणी का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। महिलाओं और बुजुर्गों का कहना है कि वे अपने ही जिले में विदेशी जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं, जहाँ उनके वर्षों पुराने संवैधानिक अधिकारों को एक तकनीकी त्रुटि ने छीन लिया है।
आज आक्रोशित समाज ने कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपते हुए प्रशासन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर पोर्टल पर कुम्हार जाति का नाम अपग्रेड कर प्रमाण पत्र बनाना शुरू नहीं किया गया, तो पूरे जिले में उग्र आंदोलन किया जाएगा। अब सवाल यह है कि डिजिटल गवर्नेंस के इस दौर में एक पूरे समाज को कागजों में ‘अस्तित्वहीन’ बनाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?











