नई दिल्ली : 2019 की शुरुआत में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन के कॉल्स और अन्य संचार को इंटरसेप्ट करने का गुप्त मिशन चलाया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह मिशन पूरी तरह असफल रहा।
मिशन के तहत अमेरिकी नेवी SEAL टीम 6 को मिनी-सबमरीन के माध्यम से उत्तर कोरिया के तट पर भेजा गया, ताकि एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण स्थापित कर किम जोंग-उन की संचार प्रणाली में सेंध डाली जा सके। लेकिन मिशन कई तकनीकी और रणनीतिक जटिलताओं की वजह से सफल नहीं हो पाया।
मुख्य चुनौतियां थीं: मिनी-सबमरीन का निर्धारित मार्ग से भटक जाना, रियल-टाइम सर्विलांस की कमी, और तट पर एक मछली पकड़ने वाली नाव से मुकाबला, जिसने मिशन रद्द करने को मजबूर कर दिया। SEAL टीम ने उच्च जोखिम के बावजूद अपने उपकरण और टीम को सुरक्षित निकालने में सफलता पाई, लेकिन उद्देश्य पूरा नहीं हो सका।
इसके बाद जून 2019 में ट्रंप और किम जोंग-उन की मुलाकात हुई, लेकिन कूटनीतिक प्रयास असफल रहे। अमेरिका की कड़ी मांगों के बावजूद उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम पर बने रहे।
यह ऑपरेशन उस समय अमेरिका की सेंधमारी और खुफिया क्षमताओं की सीमाओं को भी उजागर करता है और यह दर्शाता है कि उत्तर कोरिया की सुरक्षा और निगरानी अत्यंत सख्त है।













