Ganja Seizure Case: बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 833.271 किलोग्राम गांजा जब्ती से जुड़े एक बहुचर्चित और बड़े मामले में बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। माननीय उच्च न्यायालय ने इस मामले में सभी आरोपियों को दोषी ठहराने वाले निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) के आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया है और मामले के सभी आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया है। मामले की आधिकारिक सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच प्रक्रिया में पाई गईं गंभीर विधिक और प्रक्रियात्मक खामियों पर राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी और गहरा असंतोष व्यक्त किया है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने आरोपियों की ओर से दायर की गई आपराधिक अपीलों पर विस्तृत सुनवाई करते हुए यह कानूनन बड़ा फैसला सुनाया है।
क्या था पूरा मामला और डीआरआई की कार्रवाई?
मामले के विधिक रिकॉर्ड के मुताबिक, यह घटना 3 अक्टूबर 2021 की है, जब डीआरआई के एक खुफिया अधिकारी को पुख्ता सूचना मिली थी कि आंध्र प्रदेश से उत्तर प्रदेश के मथुरा की ओर जा रहे एक ट्रक में भारी मात्रा में मादक पदार्थ (गांजा) छिपाकर ले जाया जा रहा है। मुखबिर ने बताया था कि ट्रक क्रमांक एपी-39-टीपी-9706 के साथ सुरक्षा और एस्कॉर्ट के लिए एक महिंद्रा एक्सयूवी वाहन भी चल रहा है और यह पूरी खेप गरियाबंद जिले के तुरेंगा वन जांच चौकी से होकर गुजरेगी। इस सूचना के आधार पर डीआरआई की टीम ने इलाके में घेराबंदी कर दोपहर करीब 1:30 बजे संदिग्ध ट्रक को रोक लिया। पूछताछ में पता चला कि ट्रक में ऊपर मुरमुरे की बोरियां लदी थीं, जिसके नीचे चालाकी से गांजा छिपाया गया था।
हाईकोर्ट ने उठाए जांच प्रक्रिया पर गंभीर विधिक सवाल
हाईकोर्ट ने अपीलों की सुनवाई के दौरान डीआरआई द्वारा अपनाई गई जांच प्रक्रिया पर कई तीखे सवाल खड़े किए। अदालत ने रेखांकित किया कि जब गरियाबंद के वन चौकी पर संदिग्ध ट्रक को पकड़ा गया था, तो नियमों के तहत मौके पर ही आवश्यक कानूनी कार्रवाई और जब्ती की जानी चाहिए थी। लेकिन ऐसा करने के बजाय, जांच टीम ट्रक को करीब 150 किलोमीटर दूर डीआरआई के प्रादेशिक कार्यालय रायपुर लेकर आ गई।
अदालत ने कहा कि इस गंभीर लापरवाही के दौरान ट्रक के ठीक पीछे चल रही महिंद्रा एक्सयूवी के चालक और अन्य मुख्य संदिग्ध मौके से फरार होने में कामयाब हो गए। बाद में रायपुर कार्यालय में की गई सर्चिंग के दौरान ट्रक से कुल 833.271 किलोग्राम गांजा बरामद दिखाया गया, जिसमें डोरीलाल, चंद्रवीर उर्फ पीटू, अमित कुमार, भूपेंद्र सिंह और तुम्माला वेंकटेश्वर राव को आरोपी बनाया गया था।
निचली अदालत ने दी थी 15-15 साल की सजा, हाईकोर्ट में खुली पोल
इस मामले में विशेष एनडीपीएस कोर्ट (ट्रायल कोर्ट) ने पूर्व में सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए 15-15 वर्ष के कठोर कारावास और 1.50 लाख रुपये के तगड़े अर्थदंड की सजा सुनाई थी, जिसे आरोपियों ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पाया कि पूरे मामले में एनडीपीएस अधिनियम के अनिवार्य प्रावधानों की गंभीर प्रक्रियात्मक त्रुटियां (Procedural Lapses) हुईं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मामले का मुख्य आरोपी बंदारी चंद्रशेखर उर्फ पीटू खुद डीआरआई कार्यालय की अभिरक्षा से ही फरार हो गया था।
उच्च न्यायालय ने इसे केंद्रीय जांच एजेंसी की अक्षम्य और बड़ी लापरवाही माना है। अदालत ने डीआरआई के महानिदेशक (DG), नई दिल्ली को व्यक्तिगत रूप से आदेश की प्रति भेजकर पूरे मामले की गहन विभागीय जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। बेंच ने स्पष्ट किया कि एनडीपीएस एक्ट जैसे कड़े कानूनों में विधिक प्रक्रियाओं का अक्षरशः पालन अनिवार्य है, क्योंकि जांच में किसी भी तरह की ढिलाई आपराधिक न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को खंडित करती है।







