Umaria Coal Mine Public Hearing: दीपक विश्वकर्मा (विशेष रिपोर्ट) — उमरिया (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले अंतर्गत ट्राइबल ब्लॉक पाली के ग्राम भिम्माडोंगरी में मेसर्स जे.के. सीमेंट लिमिटेड की प्रस्तावित ‘वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ)’ भूमिगत कोयला खदान परियोजना को लेकर पर्यावरणीय जनसुनवाई आयोजित की गई। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, कंपनी प्रतिनिधियों और स्थानीय ग्रामीणों के बीच व्यापक चर्चा हुई।
जनसुनवाई के दौरान प्रभावित गांवों के निवासियों ने जल स्रोत, कृषि, स्थानीय रोजगार, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय उठाए और अपने सुझाव एवं आपत्तियां दर्ज कराईं।
1481 हेक्टेयर में विकसित होगी खदान, कई गांव होंगे प्रभावित
प्रशासनिक व कंपनी अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह प्रस्तावित भूमिगत (Underground) कोयला खदान परियोजना लगभग 1481.19 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जानी है। इस खदान की प्रस्तावित कोयला उत्पादन क्षमता 0.70 मिलियन टन प्रतिवर्ष निर्धारित की गई है।
यह परियोजना पाली ब्लॉक के अमिलिहा, भिम्माडोंगरी, महरोई, बंधवाबारा, कल्लावहरा, देवगवां, चंदनिया खुर्द, बंधवाखुर्द और बरनगांव सहित आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्रों की भूमि व पर्यावरण से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।
ग्रामीणों ने रखीं शर्तें, कंपनी ने दिया आश्वासन
जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों ने परियोजना के तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं का ब्यौरा रखा। इसके बाद ग्रामीणों को अपनी बात रखने का मौका दिया गया:
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स्थानीय रोजगार: ग्रामीणों ने मांग की कि परियोजना में प्रभावित गांवों के स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए।
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पर्यावरण व स्वास्थ्य सुरक्षा: खदान संचालन से होने वाले धूल, ध्वनि और जल प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कड़े कदम उठाने की बात कही गई।
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बुनियादी सुविधाएं: ग्रामीणों ने क्षेत्र में बेहतर सड़कों, स्वास्थ्य सेवाओं और पीने के पानी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग रखी।
कंपनी की ओर से उपस्थित जे.के. कोल माइन हेड नागावारा प्रसाद ने स्थानीय विकास और नियमानुसार कार्य करने का भरोसा दिलाया।
आपत्तियों और सुझावों के आधार पर आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
मामले में उपस्थित एडीएम प्रमोद सेन गुप्ता और क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी अशोक तिवारी ने बताया कि जनसुनवाई के दौरान दर्ज किए गए सभी मौखिक व लिखित सुझावों, आपत्तियों और मांगों को आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड कर लिया गया है।
इस पूरी रिपोर्ट को अंतिम पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance) के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा संबंधित उच्च प्राधिकारियों को प्रेषित किया जाएगा, जिसके बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई पूरी होगी।




