Municipal Corporation Corruption : बिलासपुर ‘नक्शा घोटाला’: फर्जी आर्किटेक्ट और नियमों की अनदेखी से बनी इमारतों का मायाजाल

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Municipal Corporation Corruption : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी में एक बड़े ‘नक्शा घोटाले’ का महाविस्फोट हुआ है, जहाँ नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TCP) की मिलीभगत से सैकड़ों अवैध निर्माणों को कानूनी जामा पहना दिया गया। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि शहर में 400 से अधिक नक्शे और 150 से ज्यादा लेआउट एक ऐसे आर्किटेक्ट के नाम पर मंजूर किए गए, जिसका बिलासपुर में कोई अस्तित्व ही नहीं है।

फर्जी आर्किटेक्ट का ‘नेटवर्क’: दस्तावेजों में जिस ‘विकास सिंह’ नामक आर्किटेक्ट का नाम दर्ज है, वह नगर निगम के रिकॉर्ड में न तो पंजीकृत है और न ही शहर में उपलब्ध है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स ने भी इसकी पुष्टि की है कि इस नाम का कोई पेशेवर आर्किटेक्ट उनके पास दर्ज नहीं है। हैरानी की बात यह है कि महुआ होटल जैसे अवैध निर्माणों का नक्शा भी इसी फर्जी नाम से पास हुआ था, जिसके बाद निगम ने लाइसेंस ब्लैकलिस्ट तो किया, लेकिन तब तक सैकड़ों अन्य प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी थी।

घोटाले के मुख्य बिंदु:

  • प्रोजेक्ट में हेराफेरी: ‘मेसर्स अनंत रियाल्टी’ प्रोजेक्ट में 60 फ्लैट के स्थान पर 90 फ्लैट और 4 मंजिल के बजाय 6 मंजिल की मंजूरी दी गई।

  • EWS आवास का फर्जीवाड़ा: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए जमीन आरक्षित करने का बिल्डर का शपथपत्र झूठा निकला। जिस जमीन पर आवास बनाने का दावा किया गया, वह बिल्डर के नाम पर ही दर्ज नहीं थी।

  • फास्ट-ट्रैक भ्रष्टाचार: जांच में पता चला कि प्रशासनिक नियमों को धता बताते हुए एक ही दिन में 29 लेआउट फाइलें मंजूर कर दी गईं, जो कि किसी भी सामान्य प्रक्रिया में असंभव है।

  • करोड़ों का लेनदेन: 400 से अधिक नक्शों और 150 लेआउट की स्वीकृति के पीछे करोड़ों रुपये की रिश्वतखोरी की आशंका जताई जा रही है।

प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल: इतनी बड़ी संख्या में लेआउट और नक्शों का फर्जी आर्किटेक्ट के नाम पर पास होना यह दर्शाता है कि नगर निगम का ‘अनुमोदन तंत्र’ (Approval System) या तो पूरी तरह से विफल है या फिर इसमें शामिल अधिकारी भ्रष्टाचार के बड़े नेटवर्क का हिस्सा हैं। नागरिकों और विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक प्रोजेक्ट की बात नहीं, बल्कि वर्षों से चल रहे संगठित अपराध का हिस्सा है।

सुरक्षा का खतरा: नियमों को ताक पर रखकर बनी इमारतों में पार्किंग, ओपन स्पेस और फायर सेफ्टी जैसे मानक नदारद हैं। ऐसे में ये इमारतें न केवल अवैध हैं, बल्कि इनमें रहने वाले निवासियों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर सकती हैं।

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