भोपाल : मध्यप्रदेश, जिसे देश में “टाइगर स्टेट” के रूप में पहचान मिली है, वहां लगातार बाघों की मौत का मुद्दा फिर चर्चा में है। जाने-माने वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने दावा किया है कि प्रदेश में पिछले पांच वर्षों के दौरान 224 बाघों की अप्राकृतिक मौत हुई है। इस आंकड़े ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे, संघर्ष और शिकार बड़ी वजह
बताया गया कि इन मौतों में ट्रेन और सड़क हादसे, बाघों के बीच आपसी संघर्ष तथा अन्य असामान्य परिस्थितियां शामिल हैं। साथ ही अवैध शिकार की घटनाएं भी चिंता का बड़ा कारण बताई जा रही हैं। आरोप है कि बीते वर्षों में बाहरी राज्यों के शिकार गिरोह मध्यप्रदेश में सक्रिय रहे हैं, जिससे संरक्षण तंत्र की कमजोरी उजागर होती है।
वन विभाग की लापरवाही पर आरोप
अजय दुबे ने कहा कि कई मामलों में वन विभाग की लापरवाही सामने आई है। ग्रामीणों और वन अमले के बीच समन्वय की कमी के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थितियां पैदा होती हैं, जिसका खामियाजा बाघों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है।
संरक्षण तंत्र मजबूत करने की मांग
वाइल्डलाइफ विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों की सुरक्षा के लिए निगरानी तंत्र, एंटी-पोचिंग नेटवर्क और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को और मजबूत करने की जरूरत है। साथ ही वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा, रेलवे-रोड सेफ्टी उपाय और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को प्रभावी बनाना जरूरी बताया जा रहा है।
सरकार की भूमिका पर नजर
इस मुद्दे के सामने आने के बाद अब सभी की नजर राज्य सरकार और वन विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी है। यदि संरक्षण उपायों को सख्ती से लागू नहीं किया गया तो टाइगर स्टेट की पहचान पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।











