MP News : डबरा, मध्यप्रदेश | संवाददाता: संदीप शर्मा : जहां मध्यप्रदेश सरकार “नशा मुक्त समाज” की दिशा में बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत डबरा में बिल्कुल उलट नजर आ रही है। डबरा शहर की गलियों, मोहल्लों और सड़कों पर नशे का कारोबार बेखौफ चल रहा है। गांजा, स्मैक, चरस और नशीली गोलियों का खुलेआम व्यापार हो रहा है, और यह सब प्रशासन की आंखों के सामने, बिना किसी रोक-टोक के हो रहा है।
MP News : स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह कारोबार नया नहीं है, लेकिन अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि स्कूली बच्चे भी इसकी गिरफ्त में आने लगे हैं। कई मोहल्लों में ये नशीले पदार्थ ऐसे बिकते हैं जैसे किराना की दुकान पर सामान।
प्रशासन पर मिलीभगत के आरोप
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि इस धंधे को कुछ पुलिसकर्मियों और स्थानीय प्रशासन का संरक्षण प्राप्त है। या तो अधिकारी जानबूझकर नजरें फेर लेते हैं या फिर उनकी मिलीभगत से यह काला कारोबार फल-फूल रहा है। लोगों का कहना है कि शिकायतें करने पर भी कार्रवाई केवल दिखावे की होती है और कुछ दिनों बाद धंधा फिर चालू हो जाता है।
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जागरूक नागरिकों ने शुरू की मुहिम
हालांकि, डबरा के कुछ जागरूक नागरिक और सामाजिक संस्थाएं अब इस बढ़ते खतरे के खिलाफ आवाज़ बुलंद कर रही हैं। नुक्कड़ नाटकों, जनजागरूकता रैलियों और सोशल मीडिया के माध्यम से नशे के खिलाफ जनमत तैयार किया जा रहा है। छोटे-छोटे समूहों ने मोहल्लों में जाकर नशे के दुष्परिणामों को समझाने की पहल शुरू कर दी है।
जरूरत ठोस कार्रवाई की
स्थिति इतनी गंभीर है कि अगर प्रशासन ने समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए, तो डबरा की युवा पीढ़ी पूरी तरह नशे की गिरफ्त में आ सकती है। सरकार द्वारा चलाई जा रही “नशा मुक्ति अभियान” को सिर्फ पोस्टर-बैनर तक सीमित न रखकर उसे सख्ती से लागू करने की जरूरत है। पुलिस और प्रशासन को जिम्मेदार बनाकर जवाबदेही तय करनी होगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी।
डबरा के नागरिकों का कहना है कि अगर प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो और आम जनता जागरूक बनी रहे, तो डबरा को भी नशा मुक्त बनाना मुश्किल नहीं है। अब देखना यह होगा कि इस गंभीर मुद्दे पर शासन कब जागेगा।











