सिंगरौली। बालिकाओं की शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली सामाजिक संस्था एजुकेट गर्ल्स 2025 का रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड जीतने वाली पहली भारतीय संस्था बन गई है। यह एशिया का सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान है, जो उन व्यक्तियों और संस्थाओं को दिया जाता है जिन्होंने साहस और रचनात्मकता के साथ समाज में गहरा बदलाव लाने का काम किया हो।
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एजुकेट गर्ल्स को यह पुरस्कार बालिकाओं और युवतियों की शिक्षा को बढ़ावा देने, समाज की पारंपरिक धारणाओं को चुनौती देने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उनके काम के लिए दिया गया है। संस्था की स्थापना 2007 में हुई थी और तब से अब तक यह 30,000 से अधिक गांवों में पहुंच चुकी है। 55,000 से अधिक सामुदायिक स्वयंसेवकों की मदद से संस्था ने 20 लाख से अधिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में योगदान दिया है और 24 लाख से अधिक बच्चों की पढ़ाई में सुधार किया है।
संस्था की संस्थापक सफीना हुसैन ने कहा कि यह उपलब्धि पूरी टीम, बालिका स्वयंसेवकों और उन बच्चियों के नाम है जिन्होंने अपनी शिक्षा को फिर से हासिल किया। एजुकेट गर्ल्स आने वाले दस वर्षों में एक करोड़ से अधिक बच्चों तक अपनी पहुंच बढ़ाने का लक्ष्य रखती है और इस मॉडल को दुनिया के अन्य हिस्सों में साझा करने की योजना है।
संस्था की सीईओ गायत्री नायर लोबो ने कहा कि शिक्षा केवल विकास का साधन नहीं, बल्कि हर लड़की का बुनियादी अधिकार है। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि जब सरकार, कॉरपोरेट, दाताओं और समुदाय मिलकर काम करते हैं, तो सामाजिक और संरचनात्मक चुनौतियों को बदला जा सकता है।
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इस वर्ष रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड फिलीपींस की राजधानी मनीला में 7 नवंबर को आयोजित 67वीं अवॉर्ड सेरेमनी में औपचारिक रूप से प्रदान किया जाएगा। इस अवसर पर विजेताओं को मेडल और सर्टिफिकेट प्रदान किए जाएंगे और कार्यक्रम को फाउंडेशन के आधिकारिक फेसबुक और यूट्यूब चैनल पर लाइव देखा जा सकेगा।











