Kanha Tigers CDV Infection: मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व से एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है। बाघों में CDV संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इलाज के दौरान एक और बाघ की मौत हो गई है, जिसके बाद पिछले करीब दो महीनों में इस वायरस से जान गंवाने वाले बाघों की संख्या सात तक पहुंच गई है।
वन विभाग के अनुसार, बाघों में CDV संक्रमण के लक्षण मिलने के बाद बीमार बाघ को 4 जून 2026 को किसली परिक्षेत्र के संदूक खोल क्षेत्र से रेस्क्यू किया गया था। हाथी गश्ती दल ने बाघ की खराब हालत की जानकारी अधिकारियों को दी थी।इसके बाद बाघ को तत्काल मुक्की क्वॉरेंटाइन सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज शुरू किया गया। विशेषज्ञों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही थी, लेकिन उसकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका।
विशेषज्ञों की निगरानी में हुआ उपचार
बाघों में CDV संक्रमण को देखते हुए उपचार के लिए कई संस्थानों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया था। कान्हा टाइगर रिजर्व की टीम के साथ नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा एवं विज्ञान विश्वविद्यालय और वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट (WCT) के विशेषज्ञ भी इलाज में जुटे थे।लंबे समय तक चले उपचार के बावजूद बाघ की हालत लगातार बिगड़ती गई और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।
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अप्रैल में सामने आया था पहला बड़ा मामला
कान्हा में बाघों में CDV संक्रमण का पहला बड़ा असर अप्रैल महीने में सामने आया था। सरही परिक्षेत्र के अमाही इलाके में बाघिन टी-141 के चार शावकों में से एक का शव मिला था।इसके बाद अगले कुछ दिनों में दो और शावकों की मौत हो गई। लगातार हो रही मौतों से वन विभाग की चिंता बढ़ गई और बाघिन के साथ बचे हुए शावक को रेस्क्यू कर क्वॉरेंटाइन सेंटर पहुंचाया गया।
बाघिन और शावक भी नहीं बच सके
विशेषज्ञों की तमाम कोशिशों के बावजूद बाघों में CDV संक्रमण का असर इतना गंभीर था कि 29 अप्रैल को बाघिन की मौत हो गई। कुछ समय बाद उसके जीवित बचे शावक ने भी दम तोड़ दिया।महज नौ दिनों के भीतर एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत ने वन्यजीव विशेषज्ञों को झकझोर दिया था।
महावीर बाघ की मौत ने बढ़ाई चिंता
बाघों में CDV संक्रमण का खतरा यहीं नहीं रुका। 19 मई को मुक्की परिक्षेत्र के चर्चित महावीर बाघ की भी मौत हो गई थी। जांच में उसकी मौत की वजह भी यही वायरस सामने आया था।अब एक और बाघ की मौत के बाद स्थिति और गंभीर मानी जा रही है।
आखिर कितना खतरनाक है CDV वायरस?
विशेषज्ञों के अनुसार बाघों में CDV संक्रमण पैदा करने वाला केनाइन डिस्टेम्पर वायरस बेहद खतरनाक माना जाता है। यह वायरस वन्यजीवों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है और कई बार जानलेवा साबित होता है।यदि समय रहते संक्रमण की पहचान नहीं हो पाए तो इसके फैलने का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी की जा रही है।
वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
बाघों में CDV संक्रमण को रोकने के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी अभियान शुरू किया है। वन विभाग लगातार बाघों की गतिविधियों और स्वास्थ्य पर नजर रख रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर निगरानी और उपचार ही इस खतरनाक वायरस के प्रभाव को कम कर सकता है।
वन्यजीव संरक्षण पर उठे सवाल
लगातार हो रही मौतों के बाद बाघों में CDV संक्रमण ने देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में वन्यजीव सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वन विभाग इस चुनौती से कैसे निपटता है और बाघों को इस घातक संक्रमण से बचाने के लिए क्या नए कदम उठाए जाते हैं।









