Thursday, September 17, 2026
Home Madhya Pradesh Indore Indore News: जिस मां ने 4 बेटों को दिया जन्म, उसकी अंतिम...

Indore News: जिस मां ने 4 बेटों को दिया जन्म, उसकी अंतिम विदाई में नहीं पहुंचा कोई! वृद्धाश्रम ने निभाया फर्ज

Indore Elderly Woman Case: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- मध्य प्रदेश के इंदौर से रिश्तों को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बुजुर्ग महिला की मौत के बाद उनके चारों बेटे अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंचे। परिजनों का तीन दिन तक इंतजार किया गया, लेकिन जब कोई बेटा नहीं आया तो वृद्धाश्रम और समाजसेवी संगठन के सदस्यों ने आगे बढ़कर अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई।मामला सिलिकॉन सिटी की गणेश रेसिडेंसी में रहने वाली लता बाई से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि लता बाई की 13 सितंबर को मौत हो गई थी। उनके निधन के बाद चारों बेटों को इसकी सूचना दी गई, लेकिन अंतिम संस्कार में परिवार की ओर से कोई शामिल नहीं हुआ।

जानकारी के अनुसार, लता बाई ने अपनी जिंदगी की जमा पूंजी और जेवर बेचकर एक फ्लैट खरीदा था। आरोप है कि बाद में यह फ्लैट उनके बेटों के नाम करवा दिया गया और उन्हें घर से बाहर कर दिया गया।इसके बाद लता बाई को सड़क पर भटकना पड़ा। इसी दौरान उनकी जानकारी समाजसेवी संगठन प्रीयु फाउंडेशन के अजय नागदा को मिली। संगठन की मदद से उन्हें जानकी वृद्धाश्रम में आश्रय दिलाया गया।

आठ महीने तक वृद्धाश्रम में रहीं लता बाई
बताया गया है कि लता बाई करीब आठ महीने तक जानकी वृद्धाश्रम में रहीं। इस दौरान वृद्धाश्रम के सदस्यों ने उनकी देखभाल की। बाद में तबीयत बिगड़ने पर उन्हें इंदौर के एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया।अस्पताल में इलाज के दौरान लता बाई की मौत हो गई। इसके बाद उनके चारों बेटों को निधन की सूचना दी गई, ताकि परिवार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में शामिल हो सके।
Read More: MP News: सागर कांड के बाद भी नहीं थमी चिंता, बैतूल में फोन पर घर पहुंच रही शराब, उठे गंभीर सवाल

तीन दिन तक बेटों का किया गया इंतजार
लता बाई की मौत के बाद उनके बेटों के आने का इंतजार किया गया। हालांकि, तीन दिन बीतने के बावजूद कोई बेटा अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंचा। परिवार की ओर से किसी के आगे नहीं आने पर जानकी वृद्धाश्रम और प्रीयु फाउंडेशन के सदस्यों ने अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया।संगठन से जुड़े लोगों ने आगे बढ़कर लता बाई का अंतिम संस्कार कराया। इस तरह उन्होंने उस समय बेटे का फर्ज निभाया, जब उनके अपने बेटे मौजूद नहीं थे।

बुजुर्गों की देखभाल को लेकर उठे सवाल
यह मामला बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर सवाल खड़े करता है। लता बाई के जीवन से जुड़े घटनाक्रम में फ्लैट बेटों के नाम किए जाने और बाद में उन्हें घर से बाहर किए जाने के आरोप सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।मौत के बाद अंतिम संस्कार के लिए बेटों के नहीं पहुंचने की घटना ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। वृद्धाश्रम और समाजसेवी संगठन की मदद से अंतिम संस्कार होने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया।

समाजसेवियों ने निभाई अंतिम जिम्मेदारी
लता बाई को जीवन के अंतिम दौर में आश्रय देने वाले जानकी वृद्धाश्रम और प्रीयु फाउंडेशन के सदस्यों ने उनकी अंतिम विदाई की जिम्मेदारी उठाई। घटना यह सवाल भी सामने लाती है कि बुजुर्ग माता-पिता को उनके जीवन के अंतिम पड़ाव पर भावनात्मक और सामाजिक सहारे की कितनी जरूरत होती है।फिलहाल, मामले में बेटों की ओर से अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने की वजह को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। लता बाई के साथ हुए घटनाक्रम ने परिवार, जिम्मेदारी और बुजुर्गों के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर बहस छेड़ दी है।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here