Betul News: सागर में 11 मौतों के बाद भी नहीं जागा सिस्टम! बैतूल में धड़ल्ले से शराब की होम डिलीवरी, फोन करते ही घर पहुंच रही बोतल

Sanjay Sahu

Betul News: बैतूल: सागर में 11 मौतों के बाद भी नहीं जागा सिस्टम, बैतूल में धड़ल्ले से चल रहा शराब का होम डिलीवरी नेटवर्क,शराब दुकान तक जाने की जरूरत नहीं,ग्रामीण क्षेत्रों में एक फोन पर घर पहुंच रही बोतल, ठेकों से कम दाम में मिल रहा जहर, शराब माफियाओं के नेटवर्क फैला जिले भर में चारों ओर,ढाबों होटलों पर खुलेआम परोसी जा रही शराब, दुकानों के पास संचालित हो रहे है अवैध अहाते,आबकारी विभाग सोया कुम्भकरणी नींद में, कार्यवाही के नाम पर बना रहे गरीब आदिवासी कच्ची शराब बनाने वालों को निशाना ,इसी बीच कलेक्टर ने कही कड़ी निगरानी और दोषियों पर कार्यवाही की बात, सागर में जहरीली शराब से 11 लोगों की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया, लेकिन वहीं बैतूल में सिस्टम की नींद अभी भी नहीं खुली है। बैतूल जिले में अवैध शराब का कारोबार इस कदर हावी है कि अब शराब खरीदने के लिए ठेके तक जाने की जरूरत ही नहीं पड़ रही। एक फोन घुमाइए और 20-30 मिनट में बोतल आपके दरवाजे पर।

Betul News: शहरी ढाबों होटलों अवैध आहतों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक शराब की अवैध बिक्री का ऐसा नेटवर्क फैला है, जिसमें शराब तस्कर सक्रिय हैं और कथित तौर पर कुछ दुकानों के सेल्समैन की भी मिलीभगत की चर्चाएं आम हैं। खास बात यह है कि होम डिलीवरी पर मिलने वाली शराब कथित तौर पर दुकानों की कीमत से 30 से 50 रुपए तक कम में उपलब्ध कराई जा रही है। यही सस्ता झांसा युवाओं और शराब के आदी लोगों को इस जाल में फंसा रहा है।

सवाल सिर्फ अवैध बिक्री का नहीं, सुरक्षा का भी

अवैध शराब का सबसे बड़ा खतरा केवल राजस्व चोरी नहीं है। असली चिंता इस शराब की गुणवत्ता और उसके स्रोत को लेकर है। अधिकृत दुकानों से बिकने वाली शराब पर निगरानी व्यवस्था लागू होती है, लेकिन अवैध रूप से बेची जा रही शराब कहां से आ रही है, उसमें क्या मिलावट है और उसकी गुणवत्ता की निगरानी कौन कर रहा है – यह सबसे बड़ा सवाल है।

स्थानीय स्तर पर सक्रिय माफिया फोन पर संपर्क के बाद शराब पहुंचाने का दावा करते हैं। जिसमे पानी, केमिकल मिलावट या जहरीली शराब होने का खतरा बना रहता है। एक बोतल सस्ती शराब किसी परिवार के लिए जिंदगी भर का दुख बन सकती है, इसके लिए समय रहते लगाम लगना जरूरी है।

आबकारी विभाग की निगरानी पर सवाल

शराब की अवैध बिक्री रोकने और कार्रवाई की जिम्मेदारी आबकारी विभाग की है। इसके बावजूद शहर के कोठी बाजार, गंज, सदर, टिकारी और ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब की उपलब्धता की बातें सामने आ रही हैं।

Betul News: आबकारी विभाग की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि विभाग की कार्रवाई केवल खानापूर्ति तक सीमित है। अवैध शराब के नाम पर ग्रामीण अंचलों में कच्ची शराब और महुआ लहान नष्ट करके आबकारी अपनी वाहवाही करवा लेता है वहीं कार्रवाई के नाम पर कच्ची शराब बनाने वाले लोगों को पकड़ लिया जाता है पर माफियाओं पर तो आबकारी विभाग की विशेष कृपा होती है तभी तो कोई कार्यवाही इन पर न करके किसी भी छोटे मोटे ग्रामीणों को जो कच्ची शराब बेचने का काम करते है इन्हें पकड़कर खानापूर्ति आबकारी विभाग कर देता है यहाँ सवाल यह उठता है कि शराब दुकानों के आसपास और संवेदनशील इलाकों में निगरानी कितनी प्रभावी है? क्या नियमित जांच सिर्फ कागजों में सिमटी है या वास्तव में अवैध बिक्री के नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश हो रही है?

परिवारों के लिए सबसे बड़ा खतरा

अवैध शराब का असर केवल पीने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। उसकी कीमत पूरा परिवार चुकाता है। कम कीमत के लालच में खरीदी गई सस्ती और जहरीली शराब एक साथ पूरे परिवार को बर्बाद कर सकती है। बच्चों के सिर से पिता का साया उठ सकता है, परिवार आर्थिक तंगी में आ सकता है और एक घर का भविष्य अंधेरे में जा सकता है।

शराब घर के चौके तक पहुंचने लगी है, तो समाज के हर वर्ग के लिए चिंता बढ़ रही है। बैतूल में भी ये शिकायतें और चर्चाएं आम हो चली हैं कि शराब को अब बेहद सामान्य मानकर नजरअंदाज किया जा रहा है, जो भविष्य में भारी पड़ सकता है।
कार्रवाई के बाद फिर शुरू हो जाता है खेल
स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई कोई नई बात नहीं है। समय-समय पर छापेमार कार्रवाई और जब्ती की खबरें आती हैं लेकिन सिस्टम का हाल यह है कि कार्रवाई के बाद अवैध बिक्री पूरी तरह बंद नहीं हो पाती। दो-तीन दिन शांति रहती है और फिर दोबारा धंधा उसी रफ्तार में शुरू हो जाता है।

Betul News: अब निगरानी नहीं, नेटवर्क पर प्रहार की जरूरत

Betul News: बैतूल में जरूरत सिर्फ कुछ बोतलें जब्त करने की नहीं, बल्कि अवैध शराब के पूरे नेटवर्क को चिन्हित करने की है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की अवैध बिक्री वाले संभावित स्थानों की नियमित निगरानी, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और अवैध सप्लाई के स्रोत तक पहुंचना जरूरी है।

Betul News: सागर की घटना के बाद सबसे बड़ा सबक यही है कि हादसा होने के बाद जागने से बेहतर है कि खतरे को पहले ही रोक दिया जाए। चंद रुपयों सस्ती जहरीली शराब की एक बोतल की कीमत कुछ सौ रुपए हो सकती है, लेकिन उसकी कीमत किसी परिवार को पूरी जिंदगी चुकानी पड़ सकती है।

 

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