MP High Court Promotion Verdict: मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एमपी हाई कोर्ट प्रमोशन फैसला सुनाते हुए सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा निर्णय दिया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल प्रमोशन के लिए पात्र हो जाना किसी कर्मचारी का कानूनी अधिकार नहीं बनता। इस फैसले को प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह एमपी हाई कोर्ट प्रमोशन फैसला मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के दिव्यांग कर्मचारी अचिन्त्य देब दासगुप्ता की याचिका पर आया है। उन्होंने अदालत से मांग की थी कि उन्हें वर्ष 2000 से सहायक यंत्री पद पर प्रमोशन का लाभ दिया जाए।हालांकि, हाउसिंग बोर्ड की ओर से अदालत को बताया गया कि कर्मचारी को पहले ही वर्ष 2018 से पदोन्नति का लाभ दिया जा चुका है। इसके बाद अदालत ने पिछली तारीख से लाभ देने की मांग को स्वीकार नहीं किया।
पात्रता होना और प्रमोशन मिलना दोनों अलग
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि एमपी हाई कोर्ट प्रमोशन फैसला के अनुसार किसी कर्मचारी का केवल पदोन्नति के लिए योग्य होना उसे प्रमोशन पाने का अधिकार नहीं देता। प्रमोशन देना या न देना नियोक्ता यानी सरकार या संबंधित संस्था के अधिकार क्षेत्र में आता है।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारी किसी विभाग को खाली पदों को भरने या प्रमोशन देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।
सालों बाद बैकडेट लाभ मांगना सही नहीं
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कई वर्षों बाद पुरानी तारीख से प्रमोशन और उससे जुड़े वेतन, वरिष्ठता तथा अन्य लाभों की मांग करना उचित नहीं माना जा सकता।एमपी हाई कोर्ट प्रमोशन फैसला में डिले एंड लैचेस (Delay and Laches) के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा गया कि लंबे समय तक अधिकार का दावा नहीं करने के बाद अचानक लाभ मांगने को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
1984 में नौकरी, 2000 में बने थे पात्र
मामले के अनुसार अचिन्त्य देब दासगुप्ता की नियुक्ति वर्ष 1984 में उपयंत्री के पद पर हुई थी। वह वर्ष 2000 में सहायक यंत्री पद पर पदोन्नति के लिए पात्र हो गए थे।लेकिन उन्हें पदोन्नति का लाभ वर्ष 2018 से दिया गया। इसके बाद उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर वर्ष 2000 से प्रमोशन मानते हुए वरिष्ठता और वेतन लाभ देने की मांग की थी, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया।
सरकारी कर्मचारियों पर क्या होगा असर?
इस एमपी हाई कोर्ट प्रमोशन फैसला के बाद ऐसे कर्मचारी जो कई वर्षों बाद पिछली तारीख से प्रमोशन और आर्थिक लाभ की मांग करते हैं, उनके मामलों पर असर पड़ सकता है।कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला स्पष्ट करता है कि प्रमोशन की पात्रता और प्रमोशन पाने का अधिकार दोनों अलग-अलग विषय हैं और हर मामले में परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।









