MP Cabinet Meeting: ई-बसों से कैबिनेट बैठक में पहुंचे CM मोहन यादव और मंत्री, UCC समेत कई बड़े फैसलों पर लग सकती है मुहर

Anuj Nirala

MP Cabinet Meeting: जगदीशपुर/भोपाल। मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में जगदीशपुर में शुरू हुई। इस बैठक की सबसे खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री, सभी मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और उनका स्टाफ सरकारी काफिले की जगह इलेक्ट्रिक बसों (E-Buses) से सामूहिक रूप से बैठक स्थल पहुंचे। सरकार ने इस पहल को ईंधन की बचत, पर्यावरण संरक्षण और सरकारी संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का संदेश बताया।बैठक में समान नागरिक संहिता (UCC) के मसौदे, मेडिकल यूनिवर्सिटी के पुनर्गठन और अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना है।

ई-बस से पहुंचे मुख्यमंत्री और मंत्री

कैबिनेट बैठक के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सभी मंत्री और उनका स्टाफ अपने सरकारी वाहन एवं सुरक्षा काफिला मुख्यमंत्री निवास पर छोड़कर तीन इलेक्ट्रिक बसों से बैठक स्थल पहुंचे। वहीं मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और अन्य वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों ने भी अपने वाहन कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में पार्क कर ई-बस से यात्रा की।सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य ईंधन की बचत, कार्बन उत्सर्जन में कमी और सरकारी खर्च में मितव्ययिता का संदेश देना है।

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जनजातीय संस्कृति से हुआ स्वागत

MP Cabinet Meeting: बैठक स्थल पर जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों का स्वागत किया। परिसर में जनजातीय संस्कृति पर आधारित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री ने किया। सभागार में जनजातीय वीर नायकों के चित्र भी प्रदर्शित किए गए।इस दौरान मुख्यमंत्री ने ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान के तहत पोस्टर पर हस्ताक्षर कर प्रदेशवासियों से नशामुक्त समाज बनाने की अपील भी की।

UCC पर लग सकती है मुहर

कैबिनेट बैठक में सबसे महत्वपूर्ण विषय समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) का मसौदा माना जा रहा है।

प्रस्तावित ड्राफ्ट में कई बड़े बदलाव शामिल हैं—

  • ‘नाजायज औलाद’ या ‘अवैध संतान’ जैसी कानूनी अवधारणा समाप्त कर सभी बच्चों को समान कानूनी अधिकार देने का प्रस्ताव।
  • सभी समुदायों के लिए एक समय में एक ही विवाह मान्य होगा।
  • विवाह और तलाक का पंजीयन अनिवार्य होगा।
  • यदि विवाह से पहले पति किसी अन्य महिला को गर्भवती कर चुका हो तो पत्नी को विवाह निरस्त कराने का अधिकार मिलेगा।
  • सामाजिक पंचायत या धार्मिक प्रक्रिया के जरिए दिए गए तलाक को कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी।

लिव-इन रिलेशनशिप भी कानूनी दायरे में

MP Cabinet Meeting: यूसीसी ड्राफ्ट के अनुसार लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी व्यवस्था के दायरे में लाया जाएगा।

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प्रस्ताव के प्रमुख बिंदु—

  • साथ रहने वाले जोड़े को एक माह के भीतर पंजीयन कराना अनिवार्य होगा।
  • पंजीयन नहीं कराने पर जुर्माना और जेल का प्रावधान हो सकता है।
  • संबंध टूटने पर महिला पार्टनर को पत्नी की तरह भरण-पोषण (Maintenance) मांगने का अधिकार मिलेगा।
  • पहले से विवाहित व्यक्ति या किसी अन्य पंजीकृत लिव-इन संबंध में रहने वाला व्यक्ति नया पंजीयन नहीं करा सकेगा।

ST समुदाय रहेगा UCC से बाहरमसौदे में अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय को उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों को ध्यान में रखते हुए UCC के दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव भी शामिल है।कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इस मसौदे को विधेयक के रूप में विधानसभा में पेश किया जाएगा।

मेडिकल यूनिवर्सिटी का होगा पुनर्गठनकैबिनेट में प्रदेश की एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी के पुनर्गठन का प्रस्ताव भी रखा गया है।

प्रस्ताव के अनुसार—

  • उज्जैन मेडिकल यूनिवर्सिटी के अंतर्गत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर सहित मध्य एवं पश्चिम मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेज आएंगे।
  • जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के अंतर्गत रीवा, सतना, शहडोल, सिंगरौली, छिंदवाड़ा, मंडला, बालाघाट, टीकमगढ़ सहित महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के मेडिकल कॉलेज रहेंगे।सरकार का मानना है कि इससे मेडिकल शिक्षा के प्रशासन और शैक्षणिक गतिविधियों में बेहतर समन्वय स्थापित होगा।

मंत्रियों ने किया जनजातीय नृत्य

MP Cabinet Meeting: कैबिनेट बैठक से पहले आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जनजातीय कलाकारों के साथ पारंपरिक नृत्य किया। उनके साथ मंत्री नागर सिंह चौहान, निर्मला भूरिया, राधा सिंह और कृष्णा गौर भी लोकनृत्य में शामिल हुए।

वहीं मंत्री लखन पटेल के विभाग परिवर्तन को लेकर पूछे गए सवाल पर कैलाश विजयवर्गीय ने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा, “इस बारे में मुख्यमंत्री जी ही बेहतर बता सकते हैं।”प्रदेश की इस महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक में लिए जाने वाले निर्णयों पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं। विशेष रूप से UCC, मेडिकल यूनिवर्सिटी पुनर्गठन और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े फैसले मध्य प्रदेश की नीति और शासन व्यवस्था में बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं।

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