Gondwana Mahasabha Workshop: Statement on Tribal Dharma Code: सांसद कुलस्ते का बड़ा बयान— “भील, गोंड, संथाल समेत पूरा आदिवासी समाज एकजुट हो, तभी मिलेगा धर्म कोड”

VIKASH KHALKHO

Gondwana Mahasabha Workshop: रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर में आयोजित अखिल भारतीय गोंडवाना गोंड महासभा की भव्य कार्यशाला में आदिवासी समाज के विकास, संस्कृति और अधिकारों को लेकर बड़ा मंथन हुआ। इस उच्च स्तरीय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम और मध्य प्रदेश के मंडला से सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते मुख्य रूप से शामिल हुए।

कार्यशाला के दौरान केंद्र सरकार की विभिन्न जनजातीय कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ सामाजिक एकजुटता, गोंडी भाषा के संरक्षण और आदिवासी समाज के लिए अलग धर्म कोड (Tribal Dharma Code) जैसे बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर चर्चा की गई।

गोंडी भाषा को मिले संवैधानिक दर्जा: मंत्री रामविचार नेताम

कार्यशाला को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि इस आयोजन में प्रधानमंत्री जनमन योजना, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना, आदिवासी संस्कृति, गौरवशाली इतिहास और समाज के समग्र उत्थान से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ है। उन्होंने गोंडी भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए एक बड़ी मांग का समर्थन किया।

मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि गोंडी भाषा भारत के एक बहुत बड़े भूभाग में बोली और समझी जाती है। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के अलावा महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कई अंदरूनी हिस्सों में गोंडी बोलने वाले लोग बहुसंख्या में निवास करते हैं। ऐसे में आदिवासी समाज की ओर से गोंडी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची (8th Schedule of the Constitution) में शामिल करने की जो मांग रखी गई है, वह पूरी तरह से प्रासंगिक और न्यायसंगत है।

पूरे देश का आदिवासी समाज एकमत हो, तभी मिलेगा धर्म कोड: सांसद कुलस्ते

मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने देश में लंबे समय से उठ रही ‘आदिवासी धर्म कोड’ की मांग पर एक बड़ा और व्यावहारिक बयान दिया। उन्होंने कहा कि जब तक पूरे देश का आदिवासी समाज इस विषय पर एकमत और एकजुट नहीं होगा, तब तक केंद्र सरकार के स्तर पर इस पर प्रभावी ढंग से बात आगे नहीं बढ़ सकेगी।

सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते का वक्तव्य:

“वर्तमान परिस्थितियों में भील, गोंड, संथाल, मुंडा और उरांव सहित देश के विभिन्न आदिवासी समुदाय अपनी-अपनी भौगोलिक और सामाजिक विविधताओं के अनुसार अलग-अलग मंचों से अलग-अलग मांगें रखते हैं। इस वजह से सरकार के सामने भी अलग-अलग विषय और तकनीकी पहलू आते हैं। जिस दिन पूरा देश का आदिवासी समाज आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट होकर एक सुर में धर्म कोड की मांग करेगा, उसी दिन सरकार के सामने इसे मजबूती से रखकर लागू कराने की दिशा में काम किया जाएगा।”

UCC का पांचवीं अनुसूची पर कोई प्रभाव नहीं, कांग्रेस कर रही राजनीति

समान नागरिक संहिता (UCC) के लागू होने से आदिवासी क्षेत्रों में पांचवीं अनुसूची (5th Schedule) के कमजोर होने के दावों पर फग्गन सिंह कुलस्ते ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने साफ किया कि यूसीसी के आने से पांचवीं अनुसूची के विशेष संवैधानिक प्रावधानों पर रत्ती भर भी कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी आदिवासियों के बीच भ्रम फैलाकर इस मुद्दे पर विशुद्ध रूप से राजनीति कर रही है। सरकार का मुख्य लक्ष्य पांचवीं अनुसूची के हर एक प्रावधान का वास्तविक लाभ जमीनी स्तर पर आदिवासी समाज तक सुरक्षित रूप से पहुंचाना है।

सरेंडर नक्सलियों के चुनाव लड़ने पर प्रतिक्रिया:

मुख्यधारा में लौटकर आत्मसमर्पण (Surrender) करने वाले पूर्व नक्सलियों के राजनीति में प्रवेश करने और चुनाव लड़ने के सवाल पर कुलस्ते ने लोकतांत्रिक अधिकारों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि भारत के लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी विचारधारा के साथ राजनीति करने का संवैधानिक अधिकार है। कौन व्यक्ति किस विजन और उद्देश्य के साथ चुनाव मैदान में उतरता है, यह उसका अपना व्यक्तिगत निर्णय है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले लड़ाई वामपंथी उग्रवादी विचारधारा से थी, लेकिन अब जमीनी परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। हालांकि, उन्होंने यह जरूर स्पष्ट किया कि इस पूरी राजनीतिक प्रक्रिया में भोले-भाले आदिवासी समाज का किसी भी रूप में ढाल की तरह इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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