Sunday, August 23, 2026
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MP News: बेटे की मौत के बाद बहू को बेटी बनाकर किया कन्यादान! भोपाल से आई दिल छू लेने वाली कहानी

MP Widow Remarriage Inspiration: भोपाल से सामने आई बहू का पुनर्विवाह की यह कहानी सिर्फ एक शादी की खबर नहीं, बल्कि इंसानियत, अपनापन और रिश्तों की खूबसूरती की मिसाल है। बेटे के निधन के बाद एक परिवार ने अपनी विधवा बहू को बेटी का दर्जा दिया और उसका पुनर्विवाह पूरे सम्मान के साथ कराया। सबसे भावुक पल तब आया जब ससुर ने पिता की जिम्मेदारी निभाते हुए बहू का कन्यादान किया। इस दृश्य ने शादी में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।

भोपाल के संत हिरदाराम नगर के पास ग्राम भौंरी में आयोजित इस विवाह समारोह ने लोगों का दिल जीत लिया। बहू का पुनर्विवाह कराने का फैसला किसान दिनेश बैरागी और उनके परिवार ने मिलकर लिया। विवाह की हर रस्म परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ पूरी की गई। कन्यादान के समय दिनेश बैरागी ने प्रियंका को बेटी की तरह आशीर्वाद दिया और उसके सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की।

प्रेम, अपनापन और भरोसे से जुड़ी है यह कहानी
बहू का पुनर्विवाह की इस प्रेरणादायक कहानी की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई, जब दिनेश बैरागी के बेटे कपिल का विवाह प्रियंका से हुआ। उस समय प्रियंका पढ़ाई कर रही थीं, इसलिए बाद में उनकी विदाई हुई। वर्ष 2023 में ससुराल आने के बाद उन्होंने अपने व्यवहार और संस्कारों से पूरे परिवार का दिल जीत लिया। कुछ समय बाद कपिल को कैंसर का पता चला। लंबे इलाज के बावजूद वर्ष 2024 में उनका निधन हो गया।

बेटे को खोने के बाद भी बहू का भविष्य चुना
गहरे दुख के बावजूद परिवार ने बहू का पुनर्विवाह कराने का साहसिक और संवेदनशील फैसला लिया। उनका मानना था कि प्रियंका की पूरी जिंदगी अभी बाकी है और उसे सम्मान के साथ नया जीवन मिलना चाहिए। इसी सोच के साथ उनका विवाह विदिशा जिले के ग्राम अरारी खेजड़ा निवासी गोबिंद बैरागी से कराया गया। शादी की हर जिम्मेदारी परिवार ने अपने कंधों पर उठाई।
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‘बहू नहीं, हमेशा बेटी रही’
इस बहू का पुनर्विवाह की सबसे भावुक बात तब सामने आई जब दिनेश बैरागी ने कहा कि उन्होंने प्रियंका को कभी बहू नहीं माना, वह हमेशा उनकी बेटी रही। उनके लिए उसका कन्यादान करना गर्व और सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि परिवार का असली कर्तव्य मुश्किल समय में अपने लोगों का साथ देना होता है।

समाज के लिए बनी प्रेरणा
बहू का पुनर्विवाह की यह कहानी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। प्रियंका के पिता रामबाबू बैरागी ने भी भावुक होकर कहा कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि बेटी के ससुराल वाले उसके पुनर्विवाह की पूरी जिम्मेदारी निभाएंगे। यह घटना बताती है कि बदलती सोच, संवेदनशीलता और परिवार का साथ किसी की जिंदगी को नई दिशा दे सकता है। यही वजह है कि भोपाल से आई यह कहानी अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है और रिश्तों की नई परिभाषा पेश कर रही है।

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