Sunday, September 13, 2026
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Meenakshi Natarajan की याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज! राज्यसभा सीट विवाद पर बढ़ा सियासी संग्राम

Meenakshi Natarajan Nomination Cancellation Controversy: मीनाक्षी नटराजन नामांकन निरस्तीकरण विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मध्यप्रदेश की राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की ओर से दाखिल याचिका को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया है। अदालत ने चुनावी प्रक्रिया में सीधे हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि इस तरह के मामलों के लिए संविधान में अलग कानूनी व्यवस्था तय की गई है।

सुनवाई के दौरान मीनाक्षी नटराजन नामांकन निरस्तीकरण विवाद में उनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखते हुए कहा कि रिटर्निंग अधिकारी ने शुरुआती चरण में ही उनकी उम्मीदवारी समाप्त कर दी। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें चुनाव लड़ने दिया जाए और परिणाम जनता एवं वोटों के आधार पर तय होने दिया जाए।हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और चुनाव प्रक्रिया के बीच हस्तक्षेप करने से मना कर दिया।

अनुच्छेद 329 के तहत अदालत ने बताई कानूनी प्रक्रिया
मीनाक्षी नटराजन नामांकन निरस्तीकरण विवाद पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 329(बी) का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि चुनाव से जुड़े मामलों में चुनाव प्रक्रिया पूरी होने से पहले न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकता।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उम्मीदवार चुनाव संपन्न होने के बाद हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर अपनी सभी आपत्तियां और तर्क रख सकता है।

फैसले के बाद मीनाक्षी ने लगाए गंभीर आरोप
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद मीनाक्षी नटराजन नामांकन निरस्तीकरण विवाद और ज्यादा राजनीतिक हो गया। मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि पहले वोट की चोरी हुई और अब सीट की चोरी की गई है।उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने समय पर जवाब नहीं दिया और पूरे मामले में पारदर्शिता की कमी दिखाई गई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की भावना के खिलाफ काम हुआ है।
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फॉर्म-26 को लेकर उठाए सवाल
दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान मीनाक्षी नटराजन नामांकन निरस्तीकरण विवाद की मुख्य वजह फॉर्म-26 को बताया गया।मीनाक्षी ने कहा कि उन पर जानकारी छुपाने का आरोप लगाया गया, जबकि फॉर्म में केवल लंबित आपराधिक मामलों और दोष सिद्ध होने से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी। उनके अनुसार, जिस निजी शिकायत का उल्लेख करने की बात कही गई, उसके लिए फॉर्म में अलग से कोई कॉलम मौजूद नहीं था।

राष्ट्रपति भवन मार्च से पहले कांग्रेस नेताओं को रोका गया
मीनाक्षी नटराजन नामांकन निरस्तीकरण विवाद के विरोध में मध्यप्रदेश कांग्रेस के 61 विधायक दिल्ली पहुंचे थे। उनका उद्देश्य राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर अपनी बात रखना था, लेकिन उन्हें मिलने का समय नहीं मिला।इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने पार्टी कार्यालय से राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च का ऐलान किया। मार्च शुरू होने से पहले ही दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में लिया और बाद में अन्य स्थान पर छोड़ दिया।

जीतू पटवारी और उमंग सिंघार ने सरकार पर साधा निशाना
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मीनाक्षी नटराजन नामांकन निरस्तीकरण विवाद को लेकर कांग्रेस नेताओं ने भाजपा और सरकार पर तीखे आरोप लगाए।प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि विपक्षी नेताओं और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लगातार राजनीतिक कार्रवाई की जा रही है। वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राष्ट्रपति से मिलने का समय नहीं मिलने और मार्च रोकने को लेकर नाराजगी जताई।

अब आगे क्या होगा?
मीनाक्षी नटराजन नामांकन निरस्तीकरण विवाद में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिलने के बाद अब कानूनी लड़ाई का अगला रास्ता हाई कोर्ट में चुनाव याचिका के रूप में खुला है।राज्यसभा चुनाव के इस विवाद ने मध्यप्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी प्रक्रिया दोनों तेज होने की संभावना है।

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