Mauganj Pocket Witness Scam : मऊगंज: कानून की आंखों पर पट्टी बांधकर निर्दोषों को सलाखों के पीछे भेजने का एक संगठित खेल मऊगंज जिले में उजागर हुआ है। यहाँ की नईगढ़ी और लौर पुलिस ने स्वतंत्र गवाहों के बजाय अपने ही चहेते ‘पॉकेट गवाहों’ की एक फौज खड़ी कर ली है। इस फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा चेहरा अमित कुशवाहा है, जो पुलिस का कथित ड्राइवर भी है और 500 से अधिक मुकदमों का ‘चश्मदीद’ गवाह भी।
देखे –
- मऊगंज में ‘खाकी’ का गवाह घोटाला
- जिला mauganj थाना अंर्तगत थाना Naigarhi मे पदस्थ उपनिरीक्षक जगदीश सिंह ठाकुर
- मऊगंज में ‘खाकी’ का गवाह घोटाला
उम्र नहीं बढ़ती, बस गवाही बढ़ती है
पुलिस की फाइलें झूठ कैसे बोलती हैं, इसका प्रमाण अमित कुशवाहा का रिकॉर्ड है।
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साल 2020 की FIR (0158/2020) में अमित की उम्र 20 साल दर्ज है।
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5 साल बाद, साल 2025 की FIR (0501/2025) में उसकी उम्र सिर्फ 21 साल दिखाई गई है। यानी पुलिसिया रिकॉर्ड में 5 साल बीत गए, लेकिन गवाह की उम्र सिर्फ एक साल बढ़ी।
थाना प्रभारी और ‘सुपर गवाह’ का अटूट रिश्ता
आरोप है कि नईगढ़ी थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर जहां-जहां पदस्थ होते हैं, अमित कुशवाहा वहां गवाही देने पहुंच जाता है। आरटीआई (RTI) में पुलिस ने दावा किया कि अमित उनका ड्राइवर नहीं है, लेकिन मीडिया के कैमरों ने उसे थाने की सरकारी गाड़ी चलाते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। एनडीपीएस (NDPS) से लेकर जहरीली शराब कांड तक, हर संवेदनशील मामले में अमित को ही गवाह बनाया गया है।
80 साल के बुजुर्ग पर फर्जी केस और ‘पेट्रोल’ का ‘शराब’ बनना
पुलिसिया बर्बरता का शिकार 80 वर्षीय नंदकुमार तिवारी भी हुए। एक वायरल ऑडियो ने खुलासा किया कि पुलिस ने उनके पास से शराब नहीं बल्कि पेट्रोल जब्त किया था, लेकिन केस आबकारी एक्ट का बना दिया गया। यहाँ भी गवाह वही अमित कुशवाहा था।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को ठेंगा
इंदौर के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अमानुल्लाह ने ‘पॉकेट गवाहों’ को न्याय का कत्ल बताया था। इंदौर में 165 मामलों में 2 गवाहों पर बवाल हुआ था, लेकिन नईगढ़ी पुलिस ने अकेले एक गवाह से 500 से ज्यादा गवाहियां कराकर उस रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।











