Mamata Banerjee Supreme Court Hearing : नई दिल्ली (4 फरवरी 2026)। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची (Voter List) से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोपों के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट पहुँचीं। मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए।
ममता बनर्जी की प्रमुख दलीलें:
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टारगेटेड पॉलिटिक्स: ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले जानबूझकर पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने ईसीआई को ‘व्हाट्सएप कमीशन’ कहते हुए आरोप लगाया कि बाहरी राज्यों से आए माइक्रो-ऑब्जर्वर ऑफिस में बैठकर नाम काट रहे हैं।
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महिलाओं और प्रवासी मजदूरों पर वार: उन्होंने कहा कि शादी के बाद सरनेम बदलने वाली महिलाओं और काम के सिलसिले में बाहर गए मजदूरों के नाम ‘मिसमैच’ दिखाकर हटाए जा रहे हैं।
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संस्कृति का अपमान: ममता ने रवींद्रनाथ टैगोर की स्पेलिंग में बदलाव और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेताओं को नोटिस दिए जाने का जिक्र करते हुए इसे बंगाल की पहचान पर हमला बताया।
CJI और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ:
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भाषाई संवेदनशीलता: CJI ने कहा कि बंगाल में नामों का उच्चारण और वर्तनी (Spelling) अलग हो सकती है। AI-आधारित रिकॉर्डिंग या तकनीकी गलती के कारण किसी असली नागरिक का नाम नहीं कटना चाहिए।
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न्याय का भरोसा: जब ममता बनर्जी ने स्वयं बोलना शुरू किया, तो CJI ने उन्हें टोकते हुए कहा कि उनके पास कपिल सिब्बल और श्याम दीवान जैसे सर्वश्रेष्ठ वकीलों की टीम है। कोर्ट ने आश्वासन दिया कि किसी भी निर्दोष नागरिक को लिस्ट से बाहर नहीं होने दिया जाएगा।
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असम से तुलना: कोर्ट ने सवाल किया कि यदि बंगाल में बीएलओ पर दबाव जैसी बातें हो रही हैं, तो असम या अन्य राज्यों में ऐसा क्यों नहीं हो रहा?
आंकड़ों का गणित:
वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कोर्ट को बताया कि राज्य में करीब 3.26 करोड़ नामों में ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ पाई गई है, जो कुल मतदाताओं का लगभग 20 प्रतिशत है। साथ ही 32 लाख ‘अनमैप्ड’ वोटर्स का मुद्दा भी उठाया गया।











