Earthquake Early Warning System : गैरसैंण: उत्तराखंड सरकार राज्य में भूकंप सुरक्षा चक्र को और अधिक मजबूत करने जा रही है। विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन सरकार ने जानकारी दी कि राज्य में ‘भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली’ (EEWS) के तहत वर्तमान में स्थापित 169 सेंसरों की संख्या को बढ़ाकर अब 500 किया जाएगा। संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने सदन को बताया कि इस विस्तार योजना के लिए लगभग ₹153.44 करोड़ का बजट अनुमानित है, जिसमें केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 90:10 के अनुपात में होगी।
वर्तमान में राज्य में 169 सेंसर लगे हुए हैं, जिनमें से 128 पूरी तरह सक्रिय हैं। हालांकि, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और बिजली की समस्या के कारण 41 सेंसर फिलहाल तकनीकी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की की एक विशेष तकनीकी टीम इन सेंसरों के रखरखाव और मरम्मत का काम लगातार देख रही है। अब तक इस प्रणाली पर ₹115 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं और भविष्य में इसे और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
भूकंप की दृष्टि से संवेदनशीलता को देखते हुए नए सेंसरों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘फॉल्ट लाइन्स’ पर लगाया जाएगा। इनमें हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट (HFT), मेन बाउंड्री थ्रस्ट (MBT) और मेन सेंट्रल थ्रस्ट (MCT) जैसे मुख्य क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा, नेपाल और हिमाचल प्रदेश से सटी सीमाओं पर भी विशेष फोकस रहेगा। इन सेंसरों के सटीक स्थान का निर्धारण वैज्ञानिक सर्वेक्षणों और परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद किया जाएगा।
राज्य की संवेदनशीलता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि भारतीय मानक IS 1893:2025 के अनुसार उत्तराखंड को अब ‘सीस्मिक ज़ोन 6’ (Seismic Zone 6) में रखा गया है। यह श्रेणी अत्यधिक उच्च भूकंपीय जोखिम को दर्शाती है। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार, सरकार का लक्ष्य केवल नियम बनाना नहीं, बल्कि सुरक्षित निर्माण की संस्कृति विकसित करना है। इसी दिशा में 14 सदस्यीय समिति निर्माण कानूनों में संशोधन पर भी काम कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सेंसरों की संख्या बढ़ने से राज्य के दूरदराज के इलाकों में भी भूकंप की सटीक सूचना समय रहते मिल सकेगी। यह सिस्टम भूकंप की विनाशकारी लहरों (S-waves) के पहुंचने से कुछ सेकंड पहले ही अलर्ट जारी कर देता है, जिससे जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद मिलती है। सरकार की यह योजना राष्ट्रीय भूकंप जोखिम शमन कार्यक्रम (NERMP) के तहत क्रियान्वित की जाएगी, जो राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

