रायपुर [Nishanebaaz News]। CG Women Commission FIR Order के तहत छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, सदस्य सरला कोसरिया, ओजस्वी मंडावी और दीपिका शोरी की मौजूदगी में आयोजित जनसुनवाई में एक बड़ा फैसला लिया गया है। रायपुर स्थित आयोग कार्यालय में कुल 6 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिनमें सबसे गंभीर मामला रायपुर के ईएसआईसी (ESIC) अस्पताल की 13 नर्सों के वेतन में हुई भारी धोखाधड़ी से जुड़ा रहा। आयोग ने मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए दोषी प्लेसमेंट एजेंसी, सुपरवाइजर व संबंधितों के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के कड़े निर्देश दिए हैं।
वेतन धोखाधड़ी का पूरा मामला प्रकरण के अनुसार, रायपुर स्थित ईएसआईसी अस्पताल में अनुग्रिह प्रो. विजार्ड बिजनेस सल्यूशन नामक प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से करीब दो वर्ष पूर्व 13 नर्सों की नियुक्ति नर्सिंग ऑफिसर के पद पर हुई थी। नर्सों को प्रतिमाह ₹40,000 से ₹48,000 तक वेतन मिलना तय हुआ था। हालांकि, नर्सों ने आरोप लगाया कि एजेंसी के मालिक, ठेकेदार और सुपरवाइजर ने यूको बैंक (डीडी नगर) के साथ कथित संलिप्तता बनाकर उनके पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड अपने पास जबरन रख लिए हैं। खाते में पूरा वेतन जमा होते ही आरोपी उसमें से लगभग आधी राशि चुपके से निकाल लेते थे। अनावेदकों के लगातार अनुपस्थित रहने पर आयोग ने नर्सों को पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश देते हुए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
अन्य 5 प्रकरणों में भी हुई कार्रवाई जनसुनवाई के दौरान महिला उत्पीड़न व पारिवारिक विवाद से जुड़े अन्य मामलों का भी निपटारा किया गया:
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भरण-पोषण और दूसरी शादी: एक मामले में पति द्वारा तलाक देकर दूसरी शादी करने व 1 वर्ष के बीमार बच्चे का खर्च न उठाने की शिकायत पर आयोग ने समझाइश दी, जिसके बाद पति ₹1,500 प्रतिमाह भरण-पोषण देने पर सहमत हुआ।
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एकमुश्त भरण-पोषण की मांग: तलाक और एकमुश्त भरण-पोषण की मांग करने वाली आवेदिका को परिस्थितियां देखते हुए न्यायालय जाने की सलाह देकर प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया।
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शारीरिक व मानसिक शोषण: मारपीट और आपत्तिजनक फोटो-वीडियो बनाने से संबंधित मामला पहले से न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण महिला को धारा 9 के तहत दाम्पत्य जीवन की पुनर्स्थापना हेतु परामर्श देते हुए प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया गया।

