Friday, September 25, 2026
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US vs India iPhone Price Comparison: अमेरिका और भारत में iPhone की कीमतों में भारी अंतर क्यों?

नई दिल्ली [Nishanebaaz News]। iPhone Price Breakdown India के आंकड़ों के विश्लेषण से यह साफ होता है कि भारत में एप्पल के फोन्स की कीमत सिर्फ टैक्स की वजह से नहीं, बल्कि कंपनी की प्रीमियम प्राइसिंग और ग्लोबल सप्लाई चेन के कारण अधिक होती है। भारत में लोग आईफोन खरीदने के लिए ईएमआई का सहारा तक लेते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि 1 लाख रुपये के फोन में सरकार का हिस्सा कितना है और एप्पल की जेब में कितना पैसा जाता है।

1 लाख के iPhone में सरकार का कितना हिस्सा? भारत में एप्पल की वेबसाइट पर प्रदर्शित आईफोन की कीमतों में वस्तु एवं सेवा कर (GST) पहले से शामिल होता है। मोबाइल फोन्स पर 18% जीएसटी लागू है।

  • टैक्स से पहले कीमत: ₹1,00,000 / 1.18 = ₹84,746 (लगभग)

  • सरकार का GST हिस्सा: ₹1,00,000 – ₹84,746 = ₹15,254 (लगभग)

यानी 1 लाख रुपये के आईफोन पर सरकार को करीब ₹15,254 का जीएसटी जाता है, जो केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सीजीएसटी/एसजीएसटी या आईजीएसटी के रूप में विभाजित होता है।

टैक्स के बाद बचे ₹84,746 कहां जाते हैं? जीएसटी कटने के बाद बचे ₹84,746 सीधे एप्पल का मुनाफा नहीं होते। इस रकम में निम्नलिखित खर्चे शामिल होते हैं:

  • विभिन्न देशों से मंगाए जाने वाले पार्ट्स (कंपोनेंट्स) की लागत।

  • मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली, पैकेजिंग और वेयरहाउसिंग का खर्च।

  • कस्टम ड्यूटी (2024 के बजट में बेसिक कस्टम ड्यूटी 20% से घटाकर 15% की गई थी)।

  • डिस्ट्रीब्यूशन, रिटेल मार्जिन, ट्रांसपोर्टेशन और मार्केटिंग खर्च।

  • इन सभी खर्चों को निकालने के बाद जो राशि बचती है, वह एप्पल का ‘ऑपरेटिंग प्रॉफिट Margin’ बनता है।

भारत में असेंबलिंग के बावजूद फोन महंगा क्यों? वर्ष 2026 तक दुनिया के लगभग 26% आईफोन भारत में बनने का अनुमान है, फिर भी इनकी कीमतें कम नहीं हुई हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि भारत में केवल फोन की असेंबलिंग होती है, जबकि इसके मुख्य कंपोनेंट्स 60 से अधिक देशों में फैले सप्लायर्स से इंपोर्ट किए जाते हैं।

इसके अलावा, अमेरिका की तुलना में भारत में आईफोन महंगा दिखने की एक बड़ी वजह यह भी है कि अमेरिका में दिखाई जाने वाली शुरुआती कीमत बिना सेल्स टैक्स के होती है, जबकि भारत में MRP में 18% GST पहले से जुड़ा होता है। साथ ही, एप्पल की अपनी करेंसी-रिफ्लेक्टेड प्रीमियम प्राइसिंग स्ट्रेटेजी भी भारत में इसकी ऊंची कीमतों के लिए जिम्मेदार है।

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