उज्जैन : भगवान महाकाल की पावन नगरी उज्जैन ने रविवार तड़के 30 नवंबर 2025 को एक बार फिर वह दिव्य क्षण देखा, जब पूरा महाकालेश्वर मंदिर परिसर भक्ति, मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। सुबह 4 बजे शुरू हुई प्रसिद्ध भस्म आरती ने मंदिर में उपस्थित हर भक्त को शिवत्व की अनुभूति से सराबोर कर दिया।
“हर-हर महादेव” के जयकारों से वातावरण गूँज उठा और हजारों श्रद्धालुओं ने इस दुर्लभ अनुष्ठान के साक्षी बनकर अपने को धन्य महसूस किया।
वैदिक विधि से सम्पन्न हुआ शिवलिंग अभिषेक और दिव्य भस्म श्रृंगार
प्राचीन परंपराओं के अनुसार पुजारियों ने सबसे पहले भगवान महाकाल के शिवलिंग का जल, दूध, दही, शहद, घी और पंचामृत से विधिवत अभिषेक किया। इसके बाद विशेष भस्म से श्रृंगार किया गया, जो इस आरती का प्रमुख अनुष्ठान माना जाता है।
रुद्राष्टक, शिव तांडव स्तोत्र और रुद्रपाठ के मंत्रोच्चार से गर्भगृह में ऐसी आध्यात्मिक तरंगें प्रवाहित हुईं, जिसने हर श्रद्धालु को अलौकिक अनुभूति प्रदान की।
देशभर से उमड़े श्रद्धालु, प्रथम दर्शन के लिए लगा जनसैलाब
भस्म आरती की ख्याति पूरे भारत में है। इसी कारण देश के विभिन्न राज्यों—महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और दक्षिण भारत से भारी संख्या में भक्त उज्जैन पहुँचे।कई श्रद्धालु पूरी रात कतार में खड़े रहे ताकि उन्हें प्रथम पंक्ति में बैठकर आरती के निकट से दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हो सके।भीड़ को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बल लगाए और दर्शनों को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष इंतज़ाम किए।
लाइव प्रसारण ने जोड़े देश-विदेश के लाखों भक्त
जो भाविक उज्जैन नहीं पहुँच सके, उन्होंने मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के माध्यम से भस्म आरती का सीधा प्रसारण देखा।भारत ही नहीं, विदेशों में बसे भारतीयों के लिए भी यह समारोह आध्यात्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ।परंपरा और तकनीक का यह प्रभावशाली संगम इस आरती को और भी यादगार बना गया।













