MP News- ‘साहब मेरा तालाब चोरी हो गया’ किसान की शिकायत से टीकमगढ़ में मचा हड़कंप, खुली विकास कार्यों की पोल

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Tikamgarh Missing Farm Pond Case: मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से खेत में तालाब गायब होने का मामला सामने आया है, जिसने सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास कार्यों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पलेरा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत स्यावनी में एक किसान का दावा है कि उसके खेत में तालाब बनाने के नाम पर सरकारी रिकॉर्ड में काम पूरा दर्ज है, लेकिन मौके पर तालाब मौजूद ही नहीं है। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

खेत में तालाब गायब होने का मामला ग्राम पंचायत स्यावनी के किसान चतुर कुशवाहा से जुड़ा है। बताया गया है कि चतुर कुशवाहा मजदूरी के सिलसिले में दिल्ली गए हुए थे। कुछ दिन पहले जब वह वापस गांव लौटे तो जनपद पंचायत पलेरा की जांच टीम उनके घर पहुंच गई।जांच टीम ने किसान से उसके खेत में बने तालाब के बारे में पूछा। यह सवाल सुनकर किसान हैरान रह गया, क्योंकि उसके मुताबिक खेत में कभी कोई तालाब बना ही नहीं था। इसके बाद टीम किसान के खेत पर पहुंची और मौके की स्थिति देखी।

रिकॉर्ड में ₹1.47 लाख की लागत, जमीन पर नहीं मिला तालाब
खेत में तालाब गायब होने का मामला सामने आने के बाद सरकारी रिकॉर्ड की जानकारी भी सामने आई। जांच के दौरान बताया गया कि किसान चतुर कुशवाहा पिता मोती कुशवाहा के नाम से 26 अप्रैल 2025 को खेत तालाब स्वीकृत किया गया था।दस्तावेजों के अनुसार इस काम की अनुमानित लागत 1 लाख 47 हजार 621 रुपये तय की गई थी। रिकॉर्ड में मस्टर रोल दर्ज होने की बात भी सामने आई है। लेकिन किसान का कहना है कि उसके खेत में तालाब बनाने के लिए कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ।यहीं से खेत में तालाब गायब होने का मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि वास्तव में मौके पर तालाब नहीं बना तो सरकारी रिकॉर्ड में निर्माण कार्य कैसे दर्ज हुआ? मस्टर रोल किस आधार पर तैयार किया गया और भुगतान की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ी, यह जांच का अहम हिस्सा बन गया है।

‘तालाब बना है तो मुझे खोजकर दिलाइए’
खेत में तालाब गायब होने के मामले में किसान चतुर कुशवाहा ने जिला प्रशासन से शिकायत कर पूरे मामले की जांच की मांग की है। किसान की बात भी अपने आप में इस मामले को और चौंकाने वाली बनाती है।किसान का कहना है कि यदि सरकारी कागजों में उसके खेत में तालाब बन चुका है, तो प्रशासन उसे खोजकर उसके खेत में दिखाए। किसान के मुताबिक जमीन पर ऐसा कोई तालाब मौजूद नहीं है।
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रात में जेसीबी पहुंचने से और बढ़ा विवाद
खेत में तालाब गायब होने का मामला मीडिया के संज्ञान में आने के बाद घटनाक्रम और भी चर्चा में आ गया। आरोप है कि गांव के सरपंच और सचिव ने रात करीब 11 से 12 बजे के बीच जेसीबी मशीन भेजकर तालाब खोदने की कोशिश की।हालांकि, किसान का आरोप है कि जेसीबी से उसके खेत में तालाब खोदने के बजाय पड़ोसी किसान सीताराम पाल की जमीन पर तालाबनुमा गड्ढा बना दिया गया। यह निर्माण भी रात के अंधेरे में किए जाने की बात सामने आई है। इस दावे की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

अब जांच में सामने आएगा पूरा सच
खेत में तालाब गायब होने के मामले को लेकर पलेरा जनपद पंचायत के सीईओ का कहना है कि मामला संज्ञान में आने के बाद पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है। जांच में दस्तावेज, मस्टर रोल, भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की जांच की जाएगी।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर किसान के खेत में तालाब बना ही नहीं था तो सरकारी रिकॉर्ड में उसका निर्माण कैसे दर्ज हुआ? क्या वास्तव में निर्माण हुआ था और बाद में कोई विवाद सामने आया, या फिर रिकॉर्ड में ही काम पूरा दिखाया गया? इन सभी सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।खेत में तालाब गायब होने का यह मामला फिलहाल गांव से लेकर प्रशासनिक स्तर तक चर्चा में है। जांच के नतीजे से ही यह स्पष्ट होगा कि सरकारी योजना के तहत स्वीकृत तालाब का निर्माण वास्तव में हुआ था या फिर यह काम केवल कागजों तक सीमित रह गया।

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