Lok Sabha : नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ जारी संघर्ष में एक और अहम कामयाबी का दावा किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बताया कि “ऑपरेशन महादेव” के तहत सेना ने पहलगाम हमले के पीछे जिम्मेदार आतंकियों को मार गिराया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मारे गए आतंकियों के पाकिस्तान से संबंध के पुख्ता सबूत हैं। वहीं विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की रणनीति और खुफिया तंत्र की विफलता पर सवाल उठाए हैं।
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शाह का हमला: “सेना पर भरोसा क्यों नहीं?”
गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा,
“जब सेना कार्रवाई करती है, तो विपक्ष उस पर भरोसा क्यों नहीं करता? सैनिक जान जोखिम में डालते हैं और विपक्ष उसे भी राजनीतिक चश्मे से देखता है। यह देशहित में नहीं है।”
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव के तहत सेना ने सुनियोजित ढंग से आतंकियों को ट्रैक कर खत्म किया। शाह ने कहा कि यह पूरी तरह भारतीय सेना की रणनीतिक सफलता है।
विपक्ष के सवाल: प्रियंका और अखिलेश ने उठाए खुफिया तंत्र पर सवाल
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा,
“सिर्फ जवाबी कार्रवाई का प्रचार करना पर्याप्त नहीं है, सरकार को यह भी बताना चाहिए कि इतनी बड़ी घुसपैठ कैसे हुई।”
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी कहा कि जब तक सुरक्षा एजेंसियों को राजनीतिक हस्तक्षेप से पूरी तरह मुक्त नहीं किया जाएगा, तब तक रोकथाम संभव नहीं होगी।
राहुल गांधी का तीखा हमला: “30 मिनट में कर दिया सरेंडर”
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में सरकार की “इच्छाशक्ति” पर सवाल उठाते हुए कहा कि
“हमले के 30 मिनट बाद ही पाकिस्तान को सूचित कर दिया गया कि यह कोई ‘एस्केलेटरी’ कदम नहीं है। यह सरेंडर नहीं तो और क्या है?”
उन्होंने इंदिरा गांधी के नेतृत्व की मिसाल देते हुए कहा कि 1971 में राजनीतिक नेतृत्व ने सेना को पूरी आज़ादी दी थी। राहुल ने यह भी जोड़ा कि वह खुद पीड़ित परिवारों से मिलने जम्मू-कश्मीर, यूपी जैसे राज्यों में गए हैं।
राजनाथ सिंह ने दी सेना को शाबाशी, कहा – “ज़ीरो टॉलरेंस”
राज्यसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सेना ने सीमित संसाधनों में भी अद्भुत काम किया है और
“हमारी नीति स्पष्ट है – आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस।”
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में भी सेना ने आतंकियों को करारा जवाब दिया है और खुफिया एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।
राजनीतिक इच्छाशक्ति बनी बहस का मुद्दा
सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही तरफ़ से “राजनीतिक इच्छाशक्ति” को लेकर ज़ोरदार बहस देखी गई। एक तरफ जहां विपक्ष ने इंदिरा गांधी की मिसाल दी, वहीं बीजेपी सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुए सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक को याद दिलाया।
सेना बनाम सियासत: कब रुकेगा यह टकराव?
लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई। जहां विपक्ष सरकार से जवाबदेही मांग रहा है, वहीं सत्तापक्ष इसे सेना के सम्मान से जोड़कर देख रहा है। राहुल गांधी के ‘सरेंडर’ बयान पर बीजेपी सांसदों ने कहा कि यह सेना का अपमान है।













